Speciality Restaurants ने साफ किया है कि वो Enforcement Directorate (ED) की जांच में आरोपी नहीं हैं। रेगुलेटर ने कंपनी के **₹14.50 करोड़** की राशि को प्रोविजनली अटैच किया है, जो पहले जब्त किए गए वॉरंट एप्लीकेशन मनी से जुड़ी है।
क्या है यह पूरा मामला?
Speciality Restaurants Limited ने हाल ही में जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने बताया कि वो इस जांच में 'आरोपी' (Accused) नहीं हैं, बल्कि उन्हें सिर्फ एक 'नोटिसी' (Noticee) माना गया है क्योंकि संबंधित फंड्स कंपनी के पास मौजूद हैं।
फंड्स का स्रोत क्या है?
अटैच की गई ₹14.50 करोड़ की यह रकम असल में वॉरंट्स के लिए मिले 25% अपफ्रंट एप्लीकेशन मनी का हिस्सा है। ये वॉरंट्स तब रद्द कर दिए गए थे जब अलॉटीज 18 महीने की समय सीमा में पूरा भुगतान करने में विफल रहे थे। चूंकि ये फंड्स पहले ही फॉरफीट (जब्त) किए जा चुके थे, इसलिए कंपनी का कहना है कि इससे उनके रोजमर्रा के रेस्टोरेंट ऑपरेशंस या बिजनेस लिक्विडिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
आगे क्या होगा?
यह ऑर्डर अगले 180 दिनों तक इन फंड्स की आवाजाही पर रोक लगाता है। मैनेजमेंट ने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की बात कही है। फिलहाल, कंपनी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि इस मामले का समाधान निकाला जा सके।
निवेशकों के लिए जोखिम
हालांकि कंपनी ने ऑपरेशंस पर असर न होने का भरोसा दिलाया है, लेकिन ED की जांच एक जटिल प्रक्रिया होती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह के नए कानूनी अपडेट या जांच के दायरे में संभावित विस्तार पर बारीक नजर रखें, क्योंकि ऐसी रेगुलेटरी स्क्रूटनी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकती है।
