Reliance Power को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से एक बड़ा झटका लगा है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के चलते कंपनी के प्रमोटर के शेयरों और बाकी देनदारियों पर **₹1021.19 करोड़** की प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी की है। कंपनी ने कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाएगी।
Reliance Power पर प्रवर्तन निदेशालय का एक्शन
Reliance Power लिमिटेड को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (No. 33/2026) जारी की है, जो 10 जुलाई, 2026 की है। यह ऑर्डर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जारी की गई है और यह 2017 से 2019 के बीच कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़ी जांच का हिस्सा है।
क्या-क्या हुआ अटैच?
इस ऑर्डर के तहत, Reliance Infrastructure लिमिटेड के पास रखे Reliance Power के प्रमोटर शेयर, जिनकी कीमत ₹762.75 करोड़ है, उन्हें अटैच किया गया है। इसके अलावा, Reliance Power की दो पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनियों - Sasan Power Limited (SPL) और Reliance Cleangen Limited (RCL) - से आने वाले ₹116.96 करोड़ और ₹141.48 करोड़ के बाकी देनदारियों (receivables) को भी अटैच किया गया है। कुल मिलाकर, सब्सिडियरी कंपनियों से आने वाली देनदारियों की कीमत ₹258.44 करोड़ है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
ED की यह कार्रवाई कंपनी और उसके शेयरधारकों के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा करती है। प्रमोटर के शेयर अटैच होने से मालिकाना हक और उन शेयरों की लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है। वहीं, सब्सिडियरी कंपनियों से आने वाली देनदारियों के अटैच होने से कंपनी के कैश फ्लो और आपस के वित्तीय लेन-देन पर भी असर पड़ने की आशंका है। जांच की अवधि (2017-2019) और PMLA के तहत लगाए गए आरोप चिंता का विषय हैं।
कंपनी का पक्ष
Reliance Power ने कहा है कि वह इस ऑर्डर को कोर्ट में चुनौती देगी और अपने शेयरधारकों व हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी कानूनी कदम उठाएगी।
आगे क्या?
निवेशकों को ED की जांच के नतीजों, कंपनी की कानूनी लड़ाई और अटैचमेंट ऑर्डर में किसी भी बदलाव पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। लम्बी कानूनी प्रक्रिया कंपनी के कामकाज और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती है।
