क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई, 2026 को दिए एक अहम फैसले में Reliance Industries Ltd (RIL) के खिलाफ PFUTP (Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices) नियमों के तहत लगे 'धोखाधड़ी' के आरोपों को खारिज कर दिया है। यह फैसला 2017 से चल रहे एक बड़े कानूनी मामले का अंत है।
क्यों है यह अहम?
इस फैसले से RIL पर लगे गंभीर 'धोखाधड़ी' के आरोप हट गए हैं, जिससे कंपनी के लिए कानूनी और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम काफी कम हो गए हैं। हालांकि, पोजीशन लिमिट के उल्लंघन से जुड़े डिस्क्लोजर के मामले में जुर्माना बरकरार रखा गया है, लेकिन धोखाधड़ी के आरोपों से मिली निजात कंपनी और उसके निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है।
जानिए पूरा मामला
यह मामला 2017 में शुरू हुआ था जब SEBI ने RPL स्क्रीप की ट्रेडिंग में RIL पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। SEBI ने कंपनी पर ₹447.27 करोड़ का जुर्माना लगाया था और इक्विटी डेरिवेटिव्स से एक साल का बैन लगाया था। RIL ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। इसके बाद, 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने RIL को ₹250 करोड़ इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन फंड में जमा करने का निर्देश दिया था। 2021 में, SEBI ने डिस्क्लोजर नियमों के उल्लंघन के लिए ₹25 करोड़ का जुर्माना लगाया, जिसे भी RIL ने जमा कर दिया था।
अब क्या बदलेगा?
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले ने RIL को सबसे गंभीर 'धोखाधड़ी' के आरोप से बरी कर दिया है। कंपनी पहले ही ₹250 करोड़ का भुगतान कर चुकी है और ₹25 करोड़ का जुर्माना भी भर चुकी है। यह फैसला उन भुगतानों के अनुरूप है, जहां धोखाधड़ी के आरोप खारिज हो गए हैं लेकिन डिस्क्लोजर उल्लंघन का जुर्माना बना हुआ है।
आगे क्या देखें?
हालांकि धोखाधड़ी के आरोप हट गए हैं, लेकिन SEBI और NSE के सर्कुलर के तहत डिस्क्लोजर के उल्लंघन के लिए लगाया गया जुर्माना अभी भी लागू है। निवेशकों को इस जुर्माने के किसी भी भविष्य के प्रभाव पर नजर रखनी चाहिए।
