Reliance Communications सब्सिडियरी की रेजोल्यूशन योजना NCLT ने 'अव्यवहार्य' घोषित की

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Reliance Communications सब्सिडियरी की रेजोल्यूशन योजना NCLT ने 'अव्यवहार्य' घोषित की

Reliance Communications की सब्सिडियरी RCIL की स्वीकृत रेजोल्यूशन योजना को NCLT ने फिलहाल लागू करने से मना कर दिया है। इसका मुख्य कारण असंतुष्ट लेनदारों (dissenting creditors) के लिए फंड की कमी है। अब कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) को भविष्य की राह तय करनी होगी।

Reliance Communications सब्सिडियरी की रेजोल्यूशन योजना पर NCLT का बड़ा फैसला

NCLT के 21 अगस्त, 2026 के आदेश में असंतुष्ट वित्तीय लेनदारों (DFCs) के लिए ₹26.29 करोड़ की कमी बताई गई है।

रीडर टेकअवे: रेजोल्यूशन में बड़ी बाधा; शेयरधारकों के लिए भविष्य अनिश्चित।

क्या हुआ?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच-1 ने Reliance Communications Infrastructure Limited (RCIL) - जो Reliance Communications Limited (RCOM) की एक सब्सिडियरी है - की स्वीकृत रेजोल्यूशन योजना को वर्तमान स्वरूप में लागू करने योग्य नहीं माना है। 21 अगस्त, 2026 के इस आदेश में असंतुष्ट वित्तीय लेनदारों (DFCs) के लिए फंड की कमी का खुलासा हुआ है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह डेवलपमेंट RCIL की कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में एक बड़ा रोड़ा है। 19 दिसंबर, 2023 को मंजूर की गई यह योजना अब अपने तयशुदा प्लान के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सकती, जिससे इस बिजनेस यूनिट के अंतिम समाधान और RCOM के हितधारकों पर इसके असर को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

पृष्ठभूमि

RCIL 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (IBC) के तहत कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। NCLT ने पहले RCIL के लिए एक रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। हालांकि, बाद के वित्तीय आकलन में उपलब्ध फंड और असंतुष्ट वित्तीय लेनदारों के देय राशियों के बीच अंतर का पता चला।

अब क्या बदलेगा?

NCLT, सफल रेजोल्यूशन आवेदक (SRA) को किसी निश्चित भुगतान सीमा से अधिक भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, या DFCs को भुगतान किए बिना 'इफेक्टिव डेट' लागू नहीं कर सकता। इसके बजाय, NCLT ने पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) को 30 दिनों के भीतर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। CoC इस अव्यवहार्यता पर विचार-विमर्श करेगी और अपनी व्यावसायिक समझ के आधार पर भविष्य की रणनीति तय करेगी।

जोखिम

मुख्य जोखिम RCIL के समाधान को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता बना रहना है। CoC की निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी, अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव, या यहां तक कि लिक्विडेशन की ओर झुकाव हो सकता है, जो लेनदारों की रिकवरी की संभावनाओं और संभावित रूप से RCOM को प्रभावित करेगा।

साथियों से तुलना

इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही में अक्सर ऐसी चुनौतियाँ आती हैं जहाँ वित्तीय कमी या लेनदारों के असहमति के कारण स्वीकृत योजनाएं लागू करना मुश्किल हो जाता है। NCLT की भूमिका IBC ढांचे का अनुपालन सुनिश्चित करना है, जिसने इस मामले में रेजोल्यूशन पथ के पुनर्मूल्यांकन का कारण बना है।

संदर्भ मेट्रिक्स (समय-आधारित)

मदमूल्य
IDBI (DFC) के लिए लिक्विडेशन वैल्यू₹48.22 करोड़
DFCs के लिए कुल लिक्विडेशन वैल्यू₹318.67 करोड़
SRA का अतिरिक्त भुगतान कैप₹35.00 करोड़
2 फरवरी, 2026 तक की कमी₹26.29 करोड़

आगे क्या देखें

निवेशकों को CoC की बैठक के नतीजों और NCLT को दी गई अगली अपडेट पर करीब से नजर रखनी चाहिए। अगली सुनवाई 24 सितंबर, 2026 को निर्धारित है, जो संभवतः आगे की राह पर अधिक प्रकाश डालेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.