Quasar India Limited के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। NCLT ने Bikit Private Limited की याचिका स्वीकार करते हुए कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) शुरू कर दी है। यह मामला **₹6.15 करोड़** के बकाया भुगतान से जुड़ा है।
संकट की वजह और कानूनी स्थिति
नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की दिल्ली बेंच ने 31 अक्टूबर, 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए Quasar India के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया का आदेश दिया है। इस पूरे विवाद की जड़ कृषि उत्पादों की आपूर्ति से जुड़ा एक विफल कॉन्ट्रैक्ट है। कंपनी पर कुल ₹6.15 करोड़ का बकाया है, जिसमें ₹5.39 करोड़ मूलधन (Principal) और ₹75.02 लाख का ब्याज शामिल है।
अब कंपनी का कंट्रोल किसके पास?
इस आदेश के बाद कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। अब कंपनी का पूरा कामकाज और संचालन एक अंतरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP), मिस्टर रघुनाथ भंडारी की निगरानी में होगा। साथ ही, कंपनी पर एक मोरटोरियम (Moratorium) भी लागू हो गया है, जिसके तहत कंपनी की संपत्तियों को बेचना या किसी भी प्रकार का नया कानूनी मुकदमा करना प्रतिबंधित है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मौजूदा शेयरधारकों के लिए अनिश्चितता का दौर शुरू हो गया है। अगर क्रेडिटर्स की समिति (Committee of Creditors) किसी ठोस समाधान योजना पर नहीं पहुंचती है, तो कंपनी के लिक्विडेशन यानी परिसमापन का खतरा बना रहेगा। फिलहाल, निवेशकों को सलाह है कि वे एक्सचेंज पर आने वाली IRP की अगली रिपोर्ट और क्रेडिटर्स की मीटिंग से जुड़े अपडेट्स पर पैनी नजर रखें।
