Pradhin Ltd Share: फ्रॉड का शक? कंपनी के ऑडिटर पर उठाए सवाल, ₹110 करोड़ की हेराफेरी का आरोप

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AuthorNeha Patil|Published at:
Pradhin Ltd Share: फ्रॉड का शक? कंपनी के ऑडिटर पर उठाए सवाल, ₹110 करोड़ की हेराफेरी का आरोप

Pradhin Ltd के लिए यह वक्त काफी मुश्किल भरा है। हाल ही में हुई क्रेडिटर कमेटी (CoC) की मीटिंग में जहां एक ओर फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति को मंजूरी मिली, वहीं दूसरी ओर कंपनी पर **₹110 करोड़** की फंड डायवर्जन के गंभीर आरोप लगे हैं।

ऑडिटर की नियुक्ति और आरोपों का अंबार

Pradhin Ltd की क्रेडिटर कमेटी (CoC) की दूसरी मीटिंग 14 अगस्त, 2026 को हुई, जिसमें फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की 100% उपस्थिति दर्ज की गई। इस मीटिंग में कंपनी के लिए एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करने पर सहमति बनी, जिसकी फीस ₹4.5 लाख + GST तय की गई। साथ ही, मौजूदा स्टेट्यूटरी ऑडिटर, श्री एस. पार्थ शाह, को पेंडिंग कंप्लायंस के लिए ₹2.10 लाख के शुल्क पर जारी रखने का फैसला लिया गया। स्टाफ सैलरी और किराए जैसे ऑपरेशनल खर्चों को भी मंजूरी दे दी गई।

शेयरहोल्डर ने लगाए गंभीर आरोप

हालांकि, इन महत्वपूर्ण फैसलों के बीच एक शेयरहोल्डर, मिस्टर महेश, ने कंपनी पर ₹110 करोड़ से ज्यादा की राशि को इक्विटी/राइट्स इश्यू के जरिए जुटाकर हेराफेरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने दो फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की योग्यता पर भी सवाल उठाए, कहा कि उनका पैसा असल में डेट (Debt) के बजाय वारंट्स के लिए हो सकता है।

क्यों अहम है यह मामला?

कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत, CoC के फैसले कंपनी के भविष्य के लिए बहुत मायने रखते हैं। फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति से कंपनी के वित्तीय लेनदेन की गहरी जांच होगी। यह मिस्टर महेश के आरोपों की जांच का पहला कदम है।

आगे क्या?

रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) अब शेयरहोल्डर के आरोपों की जांच करेंगे और सबूत मांगेंगे। स्टेट्यूटरी ऑडिटर की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि कंपनी के सभी जरूरी अनुपालन (Compliances) पूरे होते रहें।

जोखिम पर नजर

सबसे बड़ा जोखिम शेयरहोल्डर के आरोपों की सच्चाई साबित होना है। अगर ये आरोप सही पाए गए, तो इससे कंपनी के कुल क्लेम्स (Claims) और CIRP के नतीजों पर बड़ा असर पड़ सकता है। साथ ही, फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की योग्यता पर उठाई गई आपत्ति भी CoC की संरचना को प्रभावित कर सकती है।

शेयरहोल्डर के आरोपों का पूरा विवरण:

  • फंड डायवर्जन: इक्विटी/राइट्स इश्यू से जुटाए गए ₹110 करोड़ से अधिक की हेराफेरी का शक।
  • CoC योग्यता पर सवाल: दो फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के फंड को वारंट्स के लिए इस्तेमाल करने का आरोप।
  • ऑडिट का दायरा बढ़ाने की मांग: फॉरेंसिक ऑडिट में ₹128 करोड़ के रिसीवेबल्स (Receivables) और ₹56 करोड़ के एडवांसेज (Advances) को शामिल करने का अनुरोध।

ऑपरेशनल अपडेट्स

RP ने ICICI बैंक में एक नया CIRP बैंक अकाउंट खोला है और बाकी बैंलेंस को ट्रांसफर किया जा रहा है। कंपनी के अहमदाबाद स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस को बंद कर दिया गया है और सभी संपत्तियों को चेन्नई के रजिस्टर्ड ऑफिस में शिफ्ट कर दिया गया है।

आगे क्या देखें

निवेशकों को फॉरेंसिक ऑडिट के नतीजों और RP द्वारा शेयरहोल्डर के आरोपों की जांच पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के क्लेम्स की वैधता और Pradhin Ltd के लिए प्रस्तावित किसी भी रेज़ोल्यूशन (Resolution) पर आने वाले अपडेट्स महत्वपूर्ण होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.