NCLAT ने Polycab India के खिलाफ शुरू हुई इनसॉल्वेंसी (CIRP) कार्यवाही को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि निचली अदालत ने Asier Metals के साथ कंपनी के पहले से चले आ रहे विवाद को नजरअंदाज किया, जिससे अब कंपनी का संचालन फिर से पुराने बोर्ड के हाथों में आ गया है।
NCLAT का फैसला और निवेशकों के लिए मायने
NCLAT ने 30 अक्टूबर, 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए Polycab India के खिलाफ चल रही इनसॉल्वेंसी कार्यवाही को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही NCLT अहमदाबाद बेंच के 7 अक्टूबर, 2026 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया गया है, जिसमें ₹2.78 करोड़ के बकाया कर्ज को लेकर CIRP की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
क्यों रद्द हुई कार्यवाही?
ट्रिब्यूनल ने पाया कि निचली अदालत ने कर्जदाता Asier Metals Private Limited के साथ Polycab India के 'प्री-एक्ज़िस्टिंग डिस्प्यूट' (पहले से चल रहे विवाद) के सबूतों पर गौर नहीं किया था। IBC नियमों के तहत, यदि कर्ज पर विवाद हो, तो इनसॉल्वेंसी शुरू नहीं की जा सकती। कंपनी और लेनदार के बीच क्रेडिट नोट्स और अकाउंट रिकॉन्सिलिएशन को लेकर पहले से ही बातचीत चल रही थी, जिसे कोर्ट ने अपनी प्राथमिकता में नहीं लिया था।
अब क्या बदलेगा?
Polycab India की मैनेजमेंट ने अब कंपनी का पूरा कंट्रोल फिर से अपने हाथों में ले लिया है। इनसॉल्वेंसी के कारण ऑपरेशन्स पर जो कानूनी और तकनीकी दबाव बना हुआ था, वह अब पूरी तरह खत्म हो गया है। शेयरधारकों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि कंपनी के कामकाज में अब कोई भी कानूनी रुकावट नहीं है।
आगे क्या ध्यान रखें?
हालांकि इनसॉल्वेंसी का खतरा टल गया है, लेकिन Asier Metals के साथ चल रहा व्यावसायिक विवाद अभी भी कानूनी तौर पर सुलझाना बाकी है। निवेशकों को कंपनी की ओर से आने वाले आगे के डिस्क्लोजर पर नजर रखनी चाहिए कि इस बकाया विवाद को किस तरह से सेटल किया जा रहा है।
