सुप्रीम कोर्ट ने Parsvnath Developers और उसकी सब्सिडियरी के बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया है। साथ ही, कंपनी की संपत्तियों के सौदों पर भी रोक लगा दी गई है। यह कंपनी पहले से ही इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स के तहत रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) के नियंत्रण में है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
Parsvnath Developers पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा प्रहार
सुप्रीम कोर्ट ने Parsvnath Developers Ltd, इसकी सब्सिडियरी Parsvnath Hessa Developers Private Limited और उनके डायरेक्टर्स व ऑफिसर्स के बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कंपनी की अचल संपत्तियों पर थर्ड-पार्टी राइट्स बनाने और पजेशन देने पर भी रोक लगा दी है। यह रोक खासकर 'Parsvnath Exotica' प्रोजेक्ट, गुरुग्राम को प्रभावित करेगी।
इतना ही नहीं, कोर्ट ने डायरेक्टर्स और ऑफिसर्स के खिलाफ जमानती वारंट (Bailable Warrants) भी जारी किए हैं, जिन्हें 20 जुलाई, 2026 को कोर्ट में पेश होना होगा।
यह मामला क्यों अहम है?
इस कड़े न्यायिक कदम से कंपनी की फाइनेंशियल लिक्विडिटी (Financial Liquidity) और ऑपरेशनल कैपेसिटी (Operational Capacity) पर गंभीर असर पड़ेगा। खाते फ्रीज होने और संपत्ति के सौदों पर रोक लगने से कंपनी पूरी तरह से पंगु हो गई है। यह सब तब हुआ है जब Parsvnath Developers पहले से ही इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (Insolvency Proceedings) के तहत रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) के नियंत्रण में है।
जानिए पूरी कहानी
सुप्रीम कोर्ट का यह एक्शन 'Parsvnath Exotica' प्रोजेक्ट से जुड़ी शिकायतों पर आया है। इससे पहले, कंपनी हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के आदेशों का पालन नहीं कर रही थी। HRERA ने रिकवरी सर्टिफिकेट (Recovery Certificates) जारी किए थे, जिनकी कुल राशि ₹1.81 करोड़ थी। HRERA ने देरी के लिए 9.3% प्रति वर्ष की ब्याज दर भी लगाई थी।
अब आगे क्या होगा?
कंपनी की सामान्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। खातों के फ्रीज होने से फंड का एक्सेस नहीं होगा, और संपत्ति के सौदों पर रोक लगने से बिक्री या विकास की गतिविधियां रुक जाएंगी। अब सबकी निगाहें 20 जुलाई, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां डायरेक्टर्स को पेश होना है।
संभावित खतरे
इसमें लंबे समय तक ऑपरेशनल निष्क्रियता, गैर-अनुपालन और वारंट जारी होने से कानूनी जटिलताओं का बढ़ना, और पहले से ही जटिल इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस पर इसका असर शामिल है। थर्ड-पार्टी राइट्स बनाने या पजेशन देने में असमर्थता से और भी दावे और जुर्माने लग सकते हैं।
संदर्भ के खास आंकड़े
- कोर्ट के आदेश की तारीख: 13 जुलाई, 2026
- अगली सुनवाई की तारीख: 20 जुलाई, 2026
- कुल रिकवरी सर्टिफिकेट (Cumulative): ₹1.81 करोड़
- HRERA ब्याज दर: 9.3% प्रति वर्ष
- जमानती वारंट की राशि: प्रति व्यक्ति ₹25,000
आगे क्या देखें?
निवेशकों को 20 जुलाई, 2026 की कोर्ट सुनवाई पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्देशों, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल से कंपनी की ऑपरेशनल स्थिति पर अपडेट, और किसी भी संभावित समाधान या नई देनदारियों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
