Orissa Minerals Development: सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत! माइनिंग प्रोजेक्ट को बहाल हुई एनवायरमेंटल क्लीयरेंस की अर्ज़ी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Orissa Minerals Development: सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत! माइनिंग प्रोजेक्ट को बहाल हुई एनवायरमेंटल क्लीयरेंस की अर्ज़ी

सुप्रीम कोर्ट ने Orissa Minerals Development Company की Belkundi Iron and Mn. Mines के लिए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस (EC) एप्लीकेशन को बहाल करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला पिछले महीने आए एक ऐसे ही कोर्ट ऑर्डर के बाद आया है, जिसका असर पहले से डीलिस्ट हो चुकी एप्लीकेशन्स पर पड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई, 2026 को Vanashakti मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत, उन एनवायरमेंटल क्लीयरेंस (EC) एप्लीकेशन्स को फिर से बहाल करने और उन पर विचार करने की अनुमति दी गई है, जिन्हें पहले डीलिस्ट कर दिया गया था। खास तौर पर, The Orissa Minerals Development Company Limited (OMDC) की Belkundi Iron and Mn. Mines के लिए EC देने के प्रस्ताव को 31 मई, 2025 की स्थिति में बहाल करने का आदेश दिया गया है।

OMDC के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला OMDC के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इसने Belkundi माइंस के लिए EC प्रक्रिया में एक बड़ी रुकावट को दूर कर दिया है, जो पहले रोक दी गई थी। आपको बता दें कि मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज (MoEF&CC) ने 28 जुलाई, 2026 को ही Belkundi के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए अनुकूल सिफारिश दी थी। इस बहाली का मतलब है कि कंपनी अब औपचारिक EC प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले ने 16 मई, 2025 के अपने पहले के फैसले के प्रभाव को संशोधित किया है। कोर्ट ने 2021 के एक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को भविष्य के लिए अमान्य घोषित कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने उन एप्लीकेशन्स को बहाल करने के लिए एक तंत्र स्थापित किया है, जिन्हें 2 जनवरी, 2024 के स्टे ऑर्डर या Vanashakti-I फैसले के कारण डीलिस्ट कर दिया गया था। इससे OMDC को अपनी EC एप्लीकेशन पर आगे बढ़ने का रास्ता मिल गया है।

अब आगे क्या?

OMDC की Belkundi Iron and Mn. Mines के लिए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस की एप्लीकेशन को डीलिस्टिंग से पहले की स्थिति में वापस लाया जाएगा। अब कंपनी संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर EC प्राप्त करने के लिए बाकी औपचारिकताओं को पूरा कर सकेगी।

जोखिम पर नजर

भले ही EC प्रक्रिया बहाल हो गई हो, लेकिन EC का अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है। अंतिम मंजूरी चरण के दौरान किसी भी तरह की देरी या शर्तों से प्रोजेक्ट की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को EC के औपचारिक जारी होने पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।

कब क्या हुआ?

  • सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर: 29 जुलाई, 2026
  • पिछली एप्लीकेशन की स्थिति: 31 मई, 2025
  • MoEF&CC की सिफारिश: 28 जुलाई, 2026
  • डीलिस्टिंग स्टे ऑर्डर: 2 जनवरी, 2024

आगे क्या देखना है?

निवेशकों को Belkundi Iron and Mn. Mines के लिए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस मिलने की प्रगति और अंतिम नतीजे पर करीब से नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.