NCLT की इंदौर बेंच ने EKI Energy Services के खिलाफ दायर Insolvency याचिका को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह मामला एक पुराने कॉन्ट्रैक्ट विवाद से जुड़ा है, न कि सीधे तौर पर डिफॉल्ट का।
मामला क्या था?
Oswal Woollen Mills ने EKI Energy Services के खिलाफ ₹1.85 करोड़ के बकाया भुगतान की वसूली के लिए NCLT की इंदौर बेंच में याचिका दायर की थी। कंपनी का कहना था कि Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 9 के तहत प्रक्रिया शुरू की जाए। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इसे 'प्री-एग्जिस्टिंग डिस्प्यूट' (पहले से चल रहा विवाद) मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह फैसला EKI Energy के शेयरधारकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है क्योंकि कंपनी पर मंडरा रहा तत्काल 'कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस' (CIRP) का खतरा अब टल गया है। NCLT ने साफ किया है कि IBC का इस्तेमाल केवल कर्ज वसूली या जटिल कॉन्ट्रैक्ट विवादों को सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता।
विवाद की जड़ और आगे की राह
यह पूरा विवाद अप्रैल 2022 में हुए एक 'एमिशन रिडक्शन परचेज एग्रीमेंट' (ERPA) से जुड़ा है। Oswal Woollen Mills 'सर्टिफाइड एमिशन रिडक्शन' के भुगतान को लेकर दावा कर रही थी, जबकि EKI Energy ने प्राइस रिवीजन और इनवॉइसिंग नियमों पर मतभेद जताए थे।
हालांकि Insolvency याचिका खारिज हो गई है, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दूसरी पार्टी अब भी आर्बिट्रेशन या सिविल कोर्ट का रुख कर सकती है, इसलिए निवेशकों को कानूनी घटनाक्रमों पर नज़र रखनी चाहिए।
