McNally Bharat Engineering (MBE) को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), कोलकाता से एक बड़ा झटका लगा है। NCLT ने कंपनी को UCO बैंक और कुछ जॉइंट वेंचर (JV) एंटिटीज से कुल **₹24.25 करोड़** की रकम वापस दिलाने का आदेश दिया है। राहत की बात यह है कि इस रकम और ब्याज का असर कंपनी के Q1 FY26 के नतीजों में पहले ही शामिल कर लिया गया है।
NCLT के आदेश से आई ₹24.25 करोड़ की रिकवरी
McNally Bharat Engineering Company Ltd को 12 जून, 2026 को NCLT, कोलकाता बेंच से एक सकारात्मक आदेश मिला है। इस आदेश के तहत, कंपनी इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 की धारा 43 के तहत की गई प्रीफरेंशियल ट्रांजैक्शन (Preferential Transactions) के मामले में ₹24.25 करोड़ की रिकवरी करेगी।
किसकी कितनी देनदारी?
इस फैसले में, ट्रिब्यूनल ने UCO बैंक को ₹9.07 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया है। वहीं, विभिन्न जॉइंट वेंचर (JV) एंटिटीज जैसे McNally-Trolex JV, McNally-AML JV, और McNally-Trolex-Kilburn JV को मिलकर ₹15.18 करोड़ की राशि लौटानी होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह रिकवरी कंपनी के लिए एक बड़ी एसेट रिकवरी (Asset Recovery) का मामला है। कंपनी IBC के तहत अपने रिजोल्यूशन प्रोसेस (Resolution Process) से गुजर रही है, और NCLT का यह फैसला प्रीफरेंशियल ट्रांजैक्शन को संबोधित करता है, जिसका मकसद अप्रूव्ड रिजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) के अनुसार एसेट्स को कंसॉलिडेट करना है।
आगे क्या होगा?
रिकवर होने वाली राशि पर ट्रांजैक्शन की तारीख से लेकर भुगतान की तारीख तक 9% प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी शामिल होगा। इस पैसे का वितरण कंपनी के रिजोल्यूशन प्लान के क्लॉज 5.14 और IBC की धारा 53 के अनुसार किया जाएगा। MBE ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का वित्तीय प्रभाव 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए कंपनी के अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Unaudited Financial Results) में पहले ही दर्ज कर लिया गया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह कंपनी के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन निवेशकों को फंड्स की वास्तविक प्राप्ति और कंपनी के रिजोल्यूशन फ्रेमवर्क के अनुपालन पर नजर रखनी चाहिए।
