Kallam Textiles को NCLAT से मिली राहत! 4 हफ़्तों के लिए IBC कार्यवाही पर रोक, नए प्लान पर काम शुरू

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Kallam Textiles को NCLAT से मिली राहत! 4 हफ़्तों के लिए IBC कार्यवाही पर रोक, नए प्लान पर काम शुरू

Kallam Textiles को NCLAT, चेन्नई से इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (Insolvency Proceedings) पर 4 हफ़्तों का अंतरिम स्टे (Interim Stay) मिल गया है। अब कंपनी को अपने लेनदारों (Lenders) के सामने एक नया रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल (Restructuring Proposal) पेश करना होगा।

NCLAT ने सुनाया फैसला

Kallam Textiles Ltd को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT), चेन्नई बेंच से कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को लेकर 4 हफ़्तों का अंतरिम स्टे (Interim Stay) मिल गया है। यह ऑर्डर 20 जून, 2026 को अपलोड किया गया।

क्या हुआ?

NCLAT ने Kallam Textiles के खिलाफ CIRP की कार्यवाही पर 18 जून, 2026 से 4 हफ़्तों के लिए रोक लगा दी है। यह स्टे इस शर्त पर है कि कंपनी के सस्पेंडेड डायरेक्टर्स, लेनदारों की समिति (Committee of Creditors - CoC) के सामने एक नया और व्यापक रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल (Restructuring Proposal) तैयार कर पेश करें।

क्यों है ये ज़रूरी?

यह राहत Kallam Textiles को कर्ज निपटाने और पूरी तरह इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया से बचने के लिए एक अहम मौका देती है। कंपनी का दावा है कि वह अभी भी चालू है और सीधे तौर पर 400 लोगों को रोजगार देती है, जबकि 2000 लोग अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। इस रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल की सफलता कंपनी के भविष्य और उसके शेयरधारकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

कब और कैसे हुई शुरुआत?

Union Bank of India ने यह CIRP तब शुरू की जब कंपनी का अकाउंट 29 जून, 2023 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अमरावती बेंच ने 6 अप्रैल, 2026 को इंसॉल्वेंसी के लिए एप्लीकेशन स्वीकार कर ली थी।

अब आगे क्या?

इसका सीधा असर इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही पर रोक लगना है। Kallam Textiles को अब तय 4 हफ़्तों के अंदर एक ऐसा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान बनाना होगा जो सभी लेनदारों को मंज़ूर हो। NCLAT में इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त, 2026 को होगी।

क्या हैं जोखिम?

सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर नया रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल CoC को मंज़ूर नहीं होता है, तो CIRP की कार्यवाही फिर से शुरू हो सकती है। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत, अब एकतरफा सेटलमेंट की अनुमति नहीं है।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशकों को नए रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल के विकास पर और CoC द्वारा इसे स्वीकार करने पर करीब से नज़र रखनी चाहिए। 12 अगस्त की सुनवाई का नतीजा बेहद अहम होगा।

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