Jindal Poly Films ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी JPFL Films में मिसमैनेजमेंट का आरोप लगाते हुए Brookfield Corporation की एक इकाई के खिलाफ NCLT का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा विवाद?
Jindal Poly Films (JPFL) ने 2 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित NCLT में एक याचिका दायर की है। कंपनी का आरोप है कि उसकी सब्सिडियरी, JPFL Films Private Limited में इन्वेस्टर 'Project Holdings Fourteen (DIFC) Limited' द्वारा लगातार कुप्रबंधन और दमनकारी गतिविधियां की जा रही हैं। यह विवाद मुख्य रूप से मार्च 2024 से शुरू हुआ, जिसके बाद कंपनी ने अब कानूनी रास्ता अपनाया है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
यह मामला केवल दो कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट गवर्नेंस क्लैश है। चूँकि इसमें Brookfield Corporation से जुड़ी इकाई शामिल है, इसलिए यह मामला काफी हाई-प्रोफाइल हो गया है। कंपनी का कहना है कि इस विवाद से सब्सिडियरी के ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ रहा है।
कानूनी जंग का बैकग्राउंड
- 16 अक्टूबर, 2026: इन्वेस्टर ने Singapore International Arbitration Centre (SIAC) के जरिए आर्बिट्रेशन नोटिस भेजा, जिसमें 2022 के शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।
- 30 अक्टूबर, 2026: इन्वेस्टर ने दिल्ली हाई कोर्ट में 'आर्बिट्रेशन एंड कंसीलिएशन एक्ट' के तहत अंतरिम राहत की मांग की।
- JPFL का रुख: कंपनी ने इस आर्बिट्रेशन प्रक्रिया की अधिकारिता (jurisdiction) को ही चुनौती दी है।
आगे क्या होगा?
JPFL के मुताबिक, फिलहाल इस कानूनी लड़ाई का फाइनेंशियल असर अभी साफ नहीं है, क्योंकि कंपनी का फोकस राहत पाने पर है न कि आर्थिक नुकसान की भरपाई पर। हालांकि, निवेशकों को अब दिल्ली हाई कोर्ट और NCLT की अगली सुनवाइयों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं फैसलों से तय होगा कि सब्सिडियरी का कंट्रोल किसके पास रहेगा।
