NCLT में नई हलचल
जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) ने इलाहाबाद बेंच में चल रहे NCLT केस (C.P. No. 64 of 2023) में एक नई अर्जी (I.A. No. 57 of 2026) दायर की है। यह कदम शेयरधारकों के बीच चल रहे बड़े विवाद का हिस्सा है।
EOGM के फैसले पर सवाल
कंपनी ने 29 मई, 2026 को हुई असाधारण आम बैठक (EOGM) में पास हुए उन प्रस्तावों को चुनौती दी है, जिनका मकसद सात स्वतंत्र डायरेक्टर्स और एक होल-टाइम डायरेक्टर को पद से हटाना था।
बोर्ड की स्थिति पर असर
यह कानूनी लड़ाई सीधे तौर पर जागरण प्रकाशन के एडमिनिस्ट्रेशन और कंट्रोल को प्रभावित करती है। NCLT के फैसले का कंपनी के बोर्ड स्ट्रक्चर और ऑपरेशनल कंट्रोल पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशक इस मामले पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
NCLAT का स्टे ऑर्डर
फिलहाल, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 26 मई, 2026 के अपने स्टे ऑर्डर के ज़रिये EOGM के इन फैसलों पर रोक लगा रखी है। इसका मतलब है कि NCLT का फाइनल फैसला आने तक बोर्ड की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
क्या हैं रिस्क?
कंपनी के एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर अनिश्चितता एक बड़ा रिस्क बनी हुई है। यह कानूनी जंग निवेशकों के भरोसे और कंपनी के बिजनेस ऑपरेशन्स को प्रभावित कर सकती है। नई अर्जी में डिमैट अकाउंट एक्सेस पर रोक लगाने जैसी मांगें इस विवाद की गंभीरता को दर्शाती हैं।
अगली सुनवाई कब?
NCLT ने मुख्य केस और नई अर्जी, दोनों पर अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई, 2026 की तारीख तय की है। कोर्ट ने जवाब देने वाले पक्षकारों (Respondents) को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
