IRFC: मद्रास हाई कोर्ट से मिली राहत! ₹353 करोड़ टैक्स डिमांड खारिज, नए सिरे से होगा फैसला

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AuthorMehul Desai|Published at:
IRFC: मद्रास हाई कोर्ट से मिली राहत! ₹353 करोड़ टैक्स डिमांड खारिज, नए सिरे से होगा फैसला

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने ₹353.18 करोड़ की टैक्स डिमांड को खारिज कर दिया है, जो कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी थी। मामले को तीन महीने के भीतर नए सिरे से विचार के लिए भेजा गया है।

क्या हुआ?

मद्रास हाई कोर्ट ने 27 जुलाई, 2026 के अपने एक आदेश में चेन्नई के असिस्टेंट कमिश्नर (स्टेट टैक्स) द्वारा जारी रिकवरी नोटिस और ₹353.18 करोड़ की टैक्स डिमांड को रद्द कर दिया है। यह डिमांड इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) के उन इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से संबंधित थी जो GSTR 2A में तो उपलब्ध थे, लेकिन कंपनी द्वारा क्लेम नहीं किए जाने के कारण लैप्स हो गए थे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

इस कोर्ट के फैसले से IRFC को एक बड़ी वित्तीय देनदारी से राहत मिली है। इससे कंपनी पर तुरंत ₹353.18 करोड़ की वसूली का दबाव खत्म हो गया है, जो कि कंपनी की लिक्विडिटी (तरलता) और प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) पर असर डाल सकता था। हालांकि, यह मामला अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

चेन्नई स्टेट टैक्स विभाग ने लैप्स हुए ITC को लेकर यह टैक्स डिमांड जारी की थी। IRFC के पास GSTR 2A में यह क्रेडिट उपलब्ध था, लेकिन कंपनी ने इसका दावा नहीं किया, जिसके बाद टैक्स अधिकारियों ने वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

अब आगे क्या होगा?

हाई कोर्ट ने इस मामले को टैक्स अधिकारियों के पास नए सिरे से निर्णय लेने के लिए वापस भेज दिया है। कंपनी को कोर्ट के आदेश की प्राप्ति के तीन महीने के भीतर नया फैसला जारी करना होगा। इस प्रक्रिया में IRFC को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा, जिसमें पर्सनल हियरिंग (व्यक्तिगत सुनवाई) भी शामिल है।

क्या है जोखिम?

मुख्य जोखिम पुनर्मूल्यांकन (reassessment) के परिणाम से जुड़ा है। हालांकि मौजूदा डिमांड को खारिज कर दिया गया है, लेकिन नए फैसले में IRFC के खिलाफ निर्णय आ सकता है और समान या संशोधित डिमांड फिर से लागू की जा सकती है।

आगे क्या करें?

निवेशकों को टैक्स अधिकारियों द्वारा तीन महीने की अवधि के भीतर की जाने वाली पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही और अंतिम आदेश पर करीब से नजर रखनी चाहिए। कंपनी की नई सुनवाई में अपने मामले को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.