IRCON International को देहरादून CGST अथॉरिटी से **₹72.41 करोड़** का टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी ने इसे उत्तराखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जहां से फिलहाल कंपनी को बड़ी राहत मिली है।
विवाद की जड़ क्या है?
देहरादून के ज्वाइंट कमिश्नर (CGST) ने IRCON International को एक नोटिस भेजा है, जिसमें कंपनी पर सब-कॉन्ट्रैक्टरों की सेवाओं से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत तरीके से लाभ उठाने का आरोप लगाया गया है। कंपनी ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कोर्ट का क्या आदेश है?
26 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने GST विभाग को 4 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, IRCON को 2 हफ्ते के अंदर शो-कॉज नोटिस का जवाब देना होगा। राहत की बात यह है कि कोर्ट ने अगले आदेश तक GST विभाग पर किसी भी तरह की प्रतिकूल कार्रवाई करने पर रोक (Stay) लगा दी है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
हालाँकि फिलहाल कंपनी को स्टे मिल गया है, लेकिन अगर भविष्य में फैसला कंपनी के खिलाफ जाता है, तो उसे ₹72.41 करोड़ का सीधा झटका लग सकता है। इसमें ब्याज और पेनाल्टी का बोझ अलग से जुड़ सकता है। यह मामला निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सब-कॉन्ट्रैक्टिंग मॉडल के तहत ITC दावों पर बढ़ती सरकारी सख्ती को दर्शाता है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को अब कोर्ट की अगली सुनवाई और कंपनी द्वारा दी जाने वाली आधिकारिक जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल कानूनी कार्यवाही जारी है, जो कंपनी के मैनेजमेंट और संसाधनों पर असर डाल सकती है।
