NCLT की मंजूरी के बाद Gujarat Toolroom Ltd ने अपनी पहली 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स' (CoC) मीटिंग बुला ली है। यह बैठक कंपनी के भविष्य की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी।
दिवालिया प्रक्रिया की शुरुआत
Gujarat Toolroom Ltd ने आधिकारिक तौर पर अपनी 'कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस' (CIRP) शुरू कर दी है। कंपनी ने जानकारी दी है कि पहली CoC मीटिंग 30 अक्टूबर, 2026 को सुबह 11:30 बजे आयोजित की जाएगी। यह मीटिंग हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें सदस्य शारीरिक और वर्चुअल, दोनों तरीकों से शामिल हो सकेंगे। यह प्रक्रिया 30 सितंबर, 2026 को NCLT की अहमदाबाद बेंच द्वारा इन्सॉल्वेंसी याचिका को स्वीकार किए जाने के बाद आगे बढ़ी है।
क्यों अहम है यह बैठक?
इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया के दौरान CoC ही सर्वोच्च संस्था होती है। इसका मुख्य काम कंपनी की आर्थिक स्थिति का आकलन करना और यह तय करना है कि क्या कंपनी का रिवाइवल प्लान संभव है या उसे लिक्विडेशन (समापन) की ओर ले जाना होगा। इस कमेटी के फैसले सीधे तौर पर शेयरधारकों की संपत्ति और रिकवरी पर असर डालेंगे।
प्रक्रिया की कमान किसके हाथ में?
वर्तमान में पूरी प्रक्रिया की निगरानी 'इंटिरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल' (IRP) इकबाल सिंह गांधी कर रहे हैं। 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (IBC) के तहत IRP के पास कंपनी के प्रबंधन और संचालन का पूरा अधिकार है ताकि संपत्तियों की रक्षा की जा सके।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to watch)
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि ऐसी प्रक्रियाओं के दौरान स्टॉक में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिलता है। सबसे बड़ा रिस्क शेयर वैल्यू का कम होना या पूरी तरह से खत्म हो जाना है, जो कि रेजोल्यूशन या लिक्विडेशन के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। कंपनी का कामकाज अब पूरी तरह से IRP और CoC के निर्देशों के दायरे में है।
