NCLT की अहमदाबाद बेंच ने Gujarat Toolroom Limited के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी याचिका स्वीकार कर ली है। Naksh Steel Limited का **₹26.21 करोड़** का बकाया नहीं चुकाने के कारण कंपनी अब कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दायरे में आ गई है।
क्या है पूरा मामला?
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की अहमदाबाद बेंच ने 30 सितंबर, 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए Gujarat Toolroom Limited के लिए CIRP प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 'इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (IBC) की धारा 9 के तहत की गई है, जो Naksh Steel Limited की याचिका पर आधारित है।
मैनेजमेंट के हाथ से निकली कमान
इस आदेश के बाद कंपनी के मौजूदा बोर्ड और मैनेजमेंट को सस्पेंड कर दिया गया है। अब कंपनी का पूरा कंट्रोल इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP), मिस्टर इकबाल सिंह गांधी के हाथों में है। उन्हें कंपनी के एसेट्स की सुरक्षा करने और लेनदारों (Creditors) से दावे आमंत्रित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
- मोरेटोरियम (Moratorium): अब कंपनी के किसी भी एसेट को बेचा या गिरवी नहीं रखा जा सकता।
- ऑपरेशन्स पर निगरानी: दैनिक कामकाज पर अब IRP की पैनी नजर रहेगी।
- भविष्य का जोखिम: अगर रेजोल्यूशन प्लान सफल नहीं होता है, तो कंपनी के लिक्विडेशन की नौबत आ सकती है, जो शेयरहोल्डर्स के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
फिलहाल, निवेशकों को कंपनी द्वारा दी जाने वाली आधिकारिक जानकारी और 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स' (CoC) की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
