G R Infraprojects के लिए झटका! सब्सिडियरी GST केस हारी, ₹69.79 करोड़ पर तलवार

LAWCOURT
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
G R Infraprojects के लिए झटका! सब्सिडियरी GST केस हारी, ₹69.79 करोड़ पर तलवार

G R Infraprojects की सब्सिडियरी, नागौर-मुकुंदगढ़ हाईवेज, को एक बड़े कानूनी झटके में राजस्थान हाई कोर्ट ने GST के एक मामले में हार सुनाई है। कोर्ट ने एन्युटी पेमेंट्स पर टैक्स सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिसमें करीब ₹69.79 करोड़ का मामला फंसा है।

G R Infraprojects सब्सिडियरी को GST लिटिगेशन में हार

G R Infraprojects Ltd की सब्सिडियरी, नागौर-मुकुंदगढ़ हाईवेज प्राइवेट लिमिटेड, को राजस्थान के जोधपुर स्थित हाई कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने कंपनी की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह फैसला 17 अगस्त 2026 को सुनाया गया था और कंपनी को 18 अगस्त 2026 को प्राप्त हुआ। यह मामला एन्युटी पेमेंट्स पर लगने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़ा है।

क्या हुआ?

सब्सिडियरी ने CBIC के एक सर्कुलर नंबर 150/06/2021-GST, जो 17 जून 2021 को जारी हुआ था, की एप्लीकेबिलिटी को चुनौती दी थी। यह सर्कुलर कंसेशन एग्रीमेंट्स के तहत मिलने वाले एन्युटी पेमेंट्स पर GST लगाने से संबंधित है।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि सब्सिडियरी का एन्युटी रिसिप्ट्स पर GST लगाने के खिलाफ चुनौती असफल रही है। इस मुकदमे में करीब ₹69.79 करोड़ की राशि शामिल है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन सकता है।

पूरी कहानी

नागौर-मुकुंदगढ़ हाईवेज प्राइवेट लिमिटेड, हाईवे प्रोजेक्ट्स में शामिल है जहाँ उसे अपने कंसेशन एग्रीमेंट्स के तहत एन्युटी पेमेंट्स मिलते हैं। कंपनी ने एक विशेष GST सर्कुलर के आधार पर इन पेमेंट्स के टैक्स ट्रीटमेंट पर आपत्ति जताई थी।

अब आगे क्या?

कंपनी फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले का मूल्यांकन कर रही है। वह अपने कानूनी सलाहकारों से चर्चा के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई, जिसमें संभावित अपील भी शामिल हो सकती है, का निर्णय लेगी।

जोखिम?

मुख्य जोखिम लगभग ₹69.79 करोड़ की वित्तीय देनदारी है, जिसमें विवादित GST राशि के साथ-साथ संभावित ब्याज और पेनल्टी भी शामिल हो सकती है, अगर कंपनी को यह राशि चुकानी पड़ती है।

सेक्टर में क्या स्थिति है?

इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में विभिन्न सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स और पेमेंट स्ट्रक्चर्स पर GST की एप्लीकेबिलिटी को लेकर लिटिगेशन आम है। कंपनियां अक्सर सर्कुलर की व्याख्या और टैक्स देनदारियों से जुड़े ऐसे ही चुनौतियों का सामना करती हैं।

महत्वपूर्ण आंकड़े

इस लिटिगेशन में कुल ₹69.79 करोड़ की राशि शामिल है। हाई कोर्ट का फैसला 17 अगस्त 2026 को आया था।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.