Evoq Remedies Ltd के लिए बुरी खबर आई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद बेंच ने कंपनी को कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में स्वीकार कर लिया है। यह फैसला **9 जून, 2026** को लिया गया, जब एक ऑपरेशनल क्रेडिटर ने **₹1.95 करोड़** के कर्ज को लेकर अर्जी दी थी। अब कंपनी का मैनेजमेंट सस्पेंड कर दिया गया है।
NCLT का बड़ा फैसला: Evoq Remedies हुई CIRP में शामिल
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद बेंच ने 9 जून, 2026 को Evoq Remedies Ltd को कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में एडमिट करने का आदेश दिया है। यह कदम एक ऑपरेशनल क्रेडिटर द्वारा ₹1.95 करोड़ के बकाया भुगतान के मामले में दायर याचिका के बाद उठाया गया है।
मुख्य बिंदु:
- स्थिति: CIRP में एडमिट
- आदेश की तारीख: 09.06.2026
- दावा किया गया कर्ज: ₹1.95 करोड़ (₹1,95,00,000)
क्या हुआ?
NCLT अहमदाबाद ने Evoq Remedies Ltd के लिए CIRP प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका कारण ₹1.95 करोड़ के ऑपरेशनल कर्ज का डिफॉल्ट है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑपरेशनल क्रेडिटर ने माल के लिए एडवांस पेमेंट किया था, लेकिन कथित तौर पर माल की सप्लाई नहीं हुई या पैसे वापस नहीं किए गए।
इसका क्या मतलब है?
CIRP में एडमिट होने का मतलब है कि कंपनी का मैनेजमेंट अब सस्पेंड कर दिया गया है। कंपनी का नियंत्रण एक अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) के हाथों में चला गया है, जो अब कंपनी के कामकाज को संभालेगा। इसके साथ ही, एक 'मोरैटोरियम' (स्थगन) लागू हो गया है, जो किसी भी कानूनी कार्रवाई या संपत्ति के हस्तांतरण को रोकता है। इससे कंपनी के ऑपरेशन्स और शेयरधारकों के हितों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पूरी कहानी
यह इंसॉल्वेंसी (दिवालियापन) का मामला ₹1.95 करोड़ के ऑपरेशनल कर्ज के डिफॉल्ट के कारण सामने आया। यह कर्ज ₹2.14 करोड़ के परचेज ऑर्डर (PO No. 26) से जुड़ा हुआ था। डिफॉल्ट की तारीख 1 सितंबर, 2025 बताई गई है।
अब आगे क्या होगा?
सुश्री दीप्ति नारायण मुंद्रा को अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) नियुक्त किया गया है। वह कंपनी को एक 'गोइंग कंसर्न' (चलते-फिरते व्यवसाय) के तौर पर मैनेज करेंगी और कंपनी की संपत्तियों का कब्ज़ा लेंगी। IBC की धारा 14 के तहत लागू मोरैटोरियम के कारण, सभी तरह के मुकदमे और संपत्ति की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
जोखिमों पर नज़र
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा जोखिम अनिश्चितता है। अगर कोई व्यवहार्य समाधान योजना (resolution plan) स्वीकृत नहीं होती है या कंपनी लिक्विडेशन (समापन) की ओर बढ़ती है, तो निवेशकों को अपने निवेश को पूरी तरह से खोने का खतरा है।
तुलनात्मक स्थिति
आमतौर पर, CIRP से गुजरने वाली कंपनियां गंभीर ऑपरेशनल और वित्तीय चुनौतियों का सामना करती हैं। उनके शेयर के प्रदर्शन पर गहरा असर पड़ता है, और रिकवरी समाधान प्रक्रिया के सफल परिणाम पर निर्भर करती है।
प्रासंगिक आँकड़े
ऑपरेशनल कर्ज ₹1.95 करोड़ है, जो ₹2.14 करोड़ के परचेज ऑर्डर से उत्पन्न हुआ है। डिफॉल्ट 1 सितंबर, 2025 को हुआ था।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को NCLT से आने वाले अपडेट्स, क्रेडिटर समिति (Committee of Creditors) के गठन और Evoq Remedies Ltd के लिए प्रस्तावित किसी भी समाधान योजना पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए।
