Embassy Developments Ltd ने एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी है कि Canara Bank ने NCLAT के आदेश के खिलाफ Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है। राहत की बात यह है कि अदालत ने फिलहाल पुराने फैसले पर कोई स्टे (Stay) नहीं दिया है, जिससे कंपनी के ऑपरेशंस पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा।
Supreme Court में कानूनी लड़ाई
Canara Bank ने 4 मई, 2026 को आए NCLAT के उस आदेश को Supreme Court में चुनौती दी है, जो बैंक के पक्ष में नहीं था। फिलहाल, Supreme Court की ओर से कोई स्टे या अंतरिम राहत नहीं मिली है, जिसका मतलब है कि NCLAT का पिछला फैसला अभी भी प्रभावी है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
शेयरधारकों के लिए यह जानना जरूरी है कि कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) का कानूनी स्टेटस कंपनी के कामकाज को सीधे प्रभावित करता है। कोर्ट से कोई स्टे न मिलना कंपनी के लिए एक पॉजिटिव संकेत है, क्योंकि इससे कंपनी का कामकाज बिना किसी बाधा के जारी रहेगा। हालांकि, बैंक का Supreme Court जाना यह दर्शाता है कि विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
बैकग्राउंड और आगे की राह
यह विवाद 4 मई, 2026 के NCLAT के उस आदेश से जुड़ा है जिसे कंपनी ने अपने पक्ष में हासिल किया था। कंपनी मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनके बैलेंस शीट पर किसी भी तरह का वित्तीय जोखिम नहीं है और वे अपनी कानूनी स्थिति को लेकर आश्वस्त हैं। अब सभी की निगाहें 24 सितंबर, 2026 पर टिकी हैं, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी।
