DCM Ltd को बड़ी राहत: दिल्ली हाई कोर्ट ने डेवलपर की याचिका पर लगाई अंतरिम रोक

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AuthorNeha Patil|Published at:
DCM Ltd को बड़ी राहत: दिल्ली हाई कोर्ट ने डेवलपर की याचिका पर लगाई अंतरिम रोक

DCM Ltd की हिसार की ज़मीन को लेकर चल रहा कानूनी मामला अब एक नए मोड़ पर आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पुराने आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए प्रोजेक्ट ज़मीन पर यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है।

DCM Ltd को हाई कोर्ट में मिली अंतरिम राहत

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत, सिंगल जज द्वारा जुलाई 2026 में दिए गए उस फैसले पर रोक लगा दी गई है, जिसमें डेवलपर की याचिका को खारिज कर दिया गया था। यह फैसला DCM Ltd की हिसार, हरियाणा में 68.35 एकड़ की ज़मीन से जुड़ा है।

क्या हुआ?

12 अगस्त, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह अंतरिम आदेश सुनाया। यह आदेश 28 जुलाई, 2026 के सिंगल जज के फैसले के प्रभाव को रोकता है। उस फैसले में आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट, 1996 के तहत GCD Prime (डेवलपर) द्वारा दायर धारा 9 की याचिका को खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक डेवलपर की अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रोजेक्ट ज़मीन के संबंध में दोनों पक्ष 'यथास्थिति' बनाए रखेंगे।

क्यों अहम है यह मामला?

इस कानूनी डेवलपमेंट का मतलब है कि DCM Ltd की हिसार की ज़मीन पर किफायती आवासीय कॉलोनी बनाने की योजना फिलहाल अटकी हुई है। 'यथास्थिति' के इस आदेश के कारण, जब तक डिवीजन बेंच डेवलपर की अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुनाती, तब तक ज़मीन के संबंध में कोई भी तत्काल कार्रवाई नहीं की जा सकती। शेयरधारकों को इस मामले पर कड़ी नज़र रखनी होगी, क्योंकि केस का नतीजा इस महत्वपूर्ण ज़मीन के भविष्य को तय करेगा।

मामले की जड़ें

यह विवाद 11 अगस्त, 2022 के ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) से जुड़ा है। इस एग्रीमेंट के तहत हिसार, हरियाणा की 68.35 एकड़ ज़मीन पर दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत एक प्रोजेक्ट शुरू किया जाना था। नवंबर 2025 में, DCM Ltd ने GCD Prime के साथ JDA को खत्म कर दिया था। कंपनी का आरोप था कि डेवलपर ने अत्यधिक देरी की और समझौते का उल्लंघन किया, खासकर एक निलंबित लाइसेंस को रद्द कराने में नाकाम रहा। यह लाइसेंस हरियाणा सरकार द्वारा जारी किया गया था और अप्रैल 2023 में निलंबित कर दिया गया था।

अब क्या बदलेगा?

फिलहाल, कोर्ट के 'यथास्थिति' आदेश के तहत प्रोजेक्ट ज़मीन की स्थिति फ्रीज हो गई है। इसका मतलब है कि जब तक अपील पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक न तो DCM Ltd और न ही डेवलपर ज़मीन की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव कर सकते हैं। कंपनी की वैकल्पिक डेवलपमेंट प्लान पर आगे बढ़ने या JDA को खत्म करने की क्षमता अंतिम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी।

जोखिम पर नज़र

DCM Ltd के लिए सबसे बड़ा जोखिम हिसार प्रोजेक्ट से जुड़ी लंबी कानूनी अनिश्चितता है। HRERA द्वारा निर्देशित निलंबित लाइसेंस और फ्रीज किया गया एस्क्रो अकाउंट, ऑपरेशनल चुनौतियों को और बढ़ाते हैं। डिवीजन बेंच का अंतिम फैसला बेहद महत्वपूर्ण होगा।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को DCM Ltd की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा डेवलपर की अपील पर अंतिम फैसले का बेसब्री से इंतजार करना चाहिए। लाइसेंस की स्थिति और प्रोजेक्ट के भविष्य के डेवलपमेंट प्लान्स पर किसी भी नए अपडेट पर कड़ी नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.