Borosil Renewables: कस्टम्स विवाद में फंसी कंपनी, लगा **₹60 लाख** का जुर्माना

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Borosil Renewables: कस्टम्स विवाद में फंसी कंपनी, लगा **₹60 लाख** का जुर्माना

Borosil Renewables पर कस्टम्स विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सोलर ग्लास प्रोजेक्ट के लिए मंगाई गई मशीनों के गलत क्लासिफिकेशन के चलते कंपनी पर **₹60.3 लाख** का जुर्माना और रिडेम्पशन फाइन लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

Nhava Sheva के एडिशनल कमिश्नर ऑफ कस्टम्स ने Borosil Renewables के खिलाफ एक ऑर्डर पास किया है। विवाद का मुख्य कारण कंपनी द्वारा इंपोर्ट की गई प्लांट और मशीनरी का टैरिफ क्लासिफिकेशन है। अधिकारियों का मानना है कि कंपनी ने इन सामानों को गलत 'कस्टम टैरिफ आइटम' के तहत फाइल किया था। इसके चलते, ₹14.14 करोड़ की वैल्यू वाले सामान को कॉन्फिस्केट (जब्त) करने का आदेश दिया गया है, साथ ही जुर्माने के भुगतान पर उन्हें छुड़ाने का विकल्प दिया गया है।

कंपनी पर असर

इस ऑर्डर के तहत कंपनी को तुरंत ₹60.3 लाख का भुगतान करना होगा, जिसमें ₹30 लाख का रिडेम्पशन फाइन और ₹30.3 लाख की पेनल्टी शामिल है। कंपनी मैनेजमेंट ने साफ किया है कि इस भुगतान से कंपनी के कामकाज या प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

आगे का रास्ता

Borosil Renewables फिलहाल इस जुर्माने का भुगतान 'प्रोटेस्ट' (Protest) के तहत कर रही है ताकि आगे कोई कानूनी अड़चन न आए। साथ ही, कंपनी ने कमिश्नर ऑफ कस्टम्स (Appeals) के सामने इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर ली है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

भले ही अभी इसका वित्तीय असर बहुत सीमित है, लेकिन जानकारों का कहना है कि ऐसे क्लासिफिकेशन विवाद भविष्य में कस्टम क्लीयरेंस में देरी का कारण बन सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के कानूनी अपडेट्स पर नजर बनाए रखें, क्योंकि सोलर ग्लास मशीनों का इंपोर्ट कॉस्ट मैनेजमेंट कंपनी के लॉन्ग-टर्म मुनाफे के लिए अहम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.