Baron Infotech की दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) पर NCLAT की चेन्नई बेंच ने 'स्टे' लगा दिया है। कोर्ट ने रेजोल्यूशन प्लान में प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों और 'मैच-फिक्सिंग' जैसे गंभीर आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं, जिससे कंपनी की आगे की राह फिलहाल थम गई है।
कानूनी विवाद और NCLAT का दखल
Baron Infotech Ltd, जो कि वर्तमान में कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है, के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंपनी ने एक्सचेंज को जानकारी दी है कि 1 अक्टूबर, 2026 को NCLAT की चेन्नई बेंच ने स्टेटस को (यथास्थिति) बनाए रखने का आदेश दिया है। यह आदेश रेजोल्यूशन एप्लीकेंट विवेक कुमार रटाकोंडा द्वारा दायर एक अपील के बाद आया है, जिसमें सक्सेसफुल रेजोल्यूशन एप्लीकेंट (SRA) द्वारा पेश किए गए प्लान पर सवाल उठाए गए हैं।
क्यों मचा है बवाल?
मामले की सुनवाई के दौरान NCLAT ने CIRP प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विवाद की मुख्य जड़ SRA का वह रिवाइज्ड प्लान है, जिसमें Purple Talk India Private Limited के साथ मर्जर की रणनीति शामिल थी। ट्रिब्यूनल ने इसे 'डिस्टर्बिंग फैक्ट' माना है कि यह बदलाव केवल 5 दिनों के भीतर हुआ, जिससे जानकारी लीक होने और हेरफेर की आशंका बढ़ गई है।
इसके अलावा, खुद अपीलकर्ता ने अपनी सबमिशन में 'टाइपोग्राफिकल एरर' का हवाला देते हुए वैल्यूएशन में बड़े अंतर की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि सुधार के बाद उनके प्लान की वैल्यू ₹161.85 करोड़ से घटकर ₹92.6 करोड़ हो सकती थी। इन विसंगतियों ने पूरी प्रक्रिया की 'शुद्धता' पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आगे क्या होगा?
NCLAT ने अब पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक समय-सीमा तय की है:
- 3 नवंबर, 2026: रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) की दलीलें सुनी जाएंगी।
- 5 नवंबर, 2026: सक्सेसफुल रेजोल्यूशन एप्लीकेंट (SRA) को अपना पक्ष रखना होगा।
- 6 नवंबर, 2026: बाकी बची बहस और अपीलकर्ता का जवाब सुना जाएगा।
कोर्ट ने सभी पक्षों को स्पष्ट और संक्षिप्त नोट पेश करने के निर्देश दिए हैं ताकि न्यायिक समीक्षा को तेजी से पूरा किया जा सके।
