Ansal Properties & Infrastructure के प्रमोटर्स के लिए एक राहत भरी खबर आई है। कोर्ट ने कंपनी के **35.30%** प्रमोटर शेयरों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह रोक अगले साल **4 जुलाई 2026** तक प्रभावी रहेगी।
प्रमोटर शेयरों पर कोर्ट का अहम फैसला
रियल एस्टेट कंपनी Ansal Properties & Infrastructure Ltd को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की साकेत कोर्ट के डिस्ट्रिक्ट जज (कमर्शियल) ने कंपनी के प्रमोटर्स के 5,55,64,816 शेयरों यानी कुल हिस्सेदारी के 35.30% पर 'स्टेटस क्वो' (Status Quo) यानी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। यह आदेश अगले साल 4 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक लागू रहेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह आदेश Ansal Properties & Infrastructure द्वारा DMI Alternative Investment Fund और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दायर एक कमर्शियल सिविल सूट के जवाब में आया है। कोर्ट ने 16 जून 2026 को निर्देश दिया कि वादी (DMI Fund) इन 5,55,64,816 गिरवी रखे गए प्रमोटर शेयरों को बेच नहीं सकते और न ही इन पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बना सकते हैं। यह रोक 4 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
कोर्ट के इस फैसले से प्रमोटर ग्रुप को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि उनके 35.30% की हिस्सेदारी को तत्काल नीलाम होने या ट्रांसफर होने से बचाया गया है। हालांकि, यह फैसला कंपनी के सामने चल रहे कानूनी विवादों और वित्तीय मुश्किलों को भी उजागर करता है। कंपनी पर अभी भी कर्ज का बोझ और इनसॉल्वेंसी (Insolvency) की प्रक्रियाएं जारी हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
कंपनी का बैकग्राउंड
Ansal Properties & Infrastructure कंपनी इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रही है। कंपनी का लक्ष्य खातों का हिसाब (Rendition of Accounts) मांगना और प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी रोक (Permanent Injunction) हासिल करना है। यह विवाद जटिल वित्तीय व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ लगता है, जिसमें Amarnath Properties Pvt. Ltd. को ₹297 करोड़ की कुल सुविधा के एवज में ₹208.36 करोड़ के डिबेंचर जारी किए गए थे। इनमें से एक मुख्य सुविधा, 'Financial Facility 2', जून 2023 में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित हो गई थी, जिस पर ₹54.87 करोड़ का बकाया था।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, गिरवी रखे गए प्रमोटर शेयर तुरंत बिकने से सुरक्षित हैं। अब सभी की निगाहें 4 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर होंगी, जहाँ कोर्ट से और निर्देशों की उम्मीद है। कंपनी खातों के हिसाब के लिए कानूनी प्रयास जारी रखे हुए है।
जोखिम के पहलू:
- प्रमोटर की हिस्सेदारी पर खतरा: अगर कोर्ट का अंतिम फैसला प्रमोटर्स के खिलाफ आता है, तो 35.30% की गिरवी रखी गई हिस्सेदारी खतरे में पड़ सकती है।
- वित्तीय दबाव: 'Financial Facility 2' का NPA स्टेटस कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) और कर्ज चुकाने की क्षमता पर सवाल खड़े करता है।
- ऑपरेशनल चुनौतियां: लखनऊ, राजस्थान, ग्रेटर नोएडा और गुड़गांव जैसे कई प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत हैं या प्रोफेशनल मैनेजमेंट के अधीन हैं, जो कंपनी के ऑपरेशनल कंट्रोल को प्रभावित कर रहे हैं।
