The New India Assurance Company के लिए दूसरी तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी ने **₹1,267.04 करोड़** का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जिसके पीछे मुख्य कारण मोटर थर्ड-पार्टी क्लेम के लिए किए गए बड़े प्रोविजन और अंडरराइटिंग में हुआ नुकसान है।
नतीजों का लेखा-जोखा
बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी The New India Assurance के लिए सितंबर तिमाही के आंकड़े निराशाजनक रहे हैं। कंपनी ने ₹1,267.04 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ₹63.25 करोड़ के मुनाफे में थी। कंपनी की इस खराब परफॉर्मेंस के पीछे मोटर थर्ड-पार्टी क्लेम के लिए ₹715.41 करोड़ का प्रोविजन मुख्य वजह रहा है।
घाटे की असली वजह क्या है?
कंपनी के नतीजों पर सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का सीधा असर पड़ा है, जिसमें घरेलू कामकाज की आर्थिक वैल्यू को मान्यता दी गई है। इसके चलते कंपनी को अपने क्लेम रिजर्व में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ी। साथ ही, गुजरात और उत्तर भारत में आई बाढ़ के कारण प्रॉपर्टी सेगमेंट में क्लेम की संख्या बढ़ी, और एविएशन व हेल्थ पोर्टफोलियो में भी कंपनी को नुकसान झेलना पड़ा।
NSE के शेयर से मिली थोड़ी राहत
हालात को संभालने के लिए मैनेजमेंट ने एक बड़ा कदम उठाया। कंपनी ने NSE में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर ₹1,800 करोड़ का कैपिटल गेन हासिल किया, जिसने घाटे के असर को कुछ हद तक कम करने की कोशिश की।
आगे की चुनौतियां
निवेशकों के लिए फिलहाल रिस्क बरकरार है। कंपनी पर टैक्स और अन्य मदों में ₹10,614.72 करोड़ की कंटिजेंट लायबिलिटी (Contingent Liabilities) का बोझ है। कंपनी की CMD डॉ. लावण्या आर. मुंडायुर के नेतृत्व में अब पूरा फोकस ऑपरेशनल एफिशिएंसी और क्लेम मैनेजमेंट में सुधार लाने पर है। मार्केट की नजर अब इस पर होगी कि क्या अगली तिमाहियों में अंडरराइटिंग लॉस पर लगाम लग पाती है या नहीं।
