Yasho Industries ने अपने कर्ज (Borrowing) और एसेट-चार्ज की सीमा को **₹750 करोड़** से बढ़ाकर **₹1,250 करोड़** करने के लिए पोस्टल बैलेट प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य भविष्य के कैपिटल एक्सपेंडिचर और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करना है।
बड़े विस्तार की तैयारी
कंपनी मैनेजमेंट ने हाल ही में जारी नोटिस में बताया है कि वे कंपनी एक्ट की धारा 180(1)(c) और 180(1)(a) के तहत फंड जुटाने की अपनी क्षमता का विस्तार करना चाहते हैं। इस कदम से कंपनी को लोन, डिबेंचर या बॉन्ड के जरिए आसानी से पैसा जुटाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने नॉन-एग्जीक्यूटिव और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के लिए सालाना ₹70 लाख तक के कमीशन के लिए भी मंजूरी मांगी है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का दम
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में Yasho Industries का रेवेन्यू 22.7% बढ़कर ₹830.03 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने 33% की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की थी, जिसका मुख्य कारण नई मैन्युफैक्चरिंग लाइनों का कमर्शियलाइजेशन और पखाजन (Pakhajan) फैसिलिटी में R&D लैब का पूरी तरह से ऑपरेशनल होना रहा है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
शेयरधारकों के लिए ई-वोटिंग (e-voting) की प्रक्रिया 13 सितंबर, 2026 से शुरू हो रही है, जो 12 अक्टूबर, 2026 तक चलेगी। इस वोटिंग के लिए कट-ऑफ डेट 28 अगस्त, 2026 तय की गई थी। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी चाहिए कि मैनेजमेंट इस नई क्रेडिट लिमिट का उपयोग आने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स में किस तरह करता है।
