Xpro India: FY26 में रेवेन्यू घटा, नई क्षमता तैयार
Xpro India के 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजों के अनुसार, कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के ₹535.28 करोड़ से 5.6% घटकर ₹505.5 करोड़ रहा। वहीं, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) भी 29.3% गिरकर ₹41 करोड़ पर आ गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹58 करोड़ था।
कंपनी ने रेवेन्यू में इस गिरावट का कारण अपने कोएक्स (Coex) डिविजन में वॉल्यूम कम होना बताया है, जिसका असर रेफ्रिजरेटर शीट और लाइनर के प्रोडक्शन पर पड़ा। इसके अलावा, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, इनपुट लागत में उतार-चढ़ाव और ₹11 करोड़ का फॉरेन एक्सचेंज लॉस भी मुनाफे को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहे।
नई डाइइलेक्ट्रिक फिल्म लाइन शुरू
वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, Xpro India ने 27 मार्च 2026 को अपने बारजोरा प्लांट में नई डाइइलेक्ट्रिक फिल्म लाइन को सफलतापूर्वक चालू करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी का लक्ष्य इस नई लाइन की कम से कम 50% क्षमता का उपयोग करना है।
इसके अतिरिक्त, यूएई (RAK) में विस्तार परियोजना भी आगे बढ़ रही है। यहां ट्रायल प्रोडक्शन अगस्त-सितंबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि तीसरी तिमाही 2026 तक पूर्ण व्यावसायिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य है।
डिविडेंड और नेतृत्व
Xpro India ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है। कंपनी ने गिरीश बेहल को मैनेजिंग डायरेक्टर डेजिग्नेट के रूप में नियुक्त करने की भी घोषणा की है।
नई लाइन का रणनीतिक महत्व
बारजोरा डाइइलेक्ट्रिक फिल्म लाइन का संचालन Xpro India के लिए उच्च-मूल्य वाले उत्पाद खंडों में एक रणनीतिक प्रवेश का प्रतीक है। इन विशेष फिल्मों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इनवर्टर, सौर प्रणाली और पवन टरबाइन में किया जाएगा, जिसका उद्देश्य कंपनी की पेशकशों में विविधता लाना और भविष्य के विकास को गति देना है।
मुख्य जोखिम
संभावित जोखिमों में कोएक्स डिविजन में वॉल्यूम में निरंतर कमी, मुनाफे पर फॉरेन एक्सचेंज की अस्थिरता का प्रभाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक चिंताएं शामिल हैं जो आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकती हैं। नए उत्पादों के लिए ग्राहक सत्यापन (customer validation) और बाजार में पैठ बनाने में लगने वाला समय भी एक चुनौती पेश करता है।
आउटलुक और निवेशकों का फोकस
निवेशक नई बारजोरा लाइन की क्षमता उपयोग और यूएई परियोजना की प्रगति पर नजर रखेंगे। कंपनी की अपने राजस्व में उच्च-मूल्य वाले उत्पादों के अनुपात को बढ़ाने की क्षमता और मार्जिन रिकवरी व फॉरेक्स जोखिम कम करने की उसकी रणनीतियाँ मुख्य फोकस क्षेत्र होंगी।
