Wonder Electricals का FY26 का प्रदर्शन निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा है। कंपनी का रेवेन्यू गिरकर **₹654.75 करोड़** रह गया है, जबकि नेट प्रॉफिट (PAT) आधा होकर केवल **₹9.11 करोड़** पर आ गया है। इस बीच, SEBI की चेतावनी ने कंपनी की कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल
कंपनी के नतीजों पर नजर डालें तो पिछले साल के मुकाबले प्रदर्शन में बड़ी गिरावट देखी गई है। पिछले साल रेवेन्यू ₹894.50 करोड़ था, जो इस बार घटकर ₹654.75 करोड़ रह गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट (PAT) भी ₹19.01 करोड़ से लुढ़क कर ₹9.11 करोड़ पर आ गया है। कंपनी ने ₹0.10 प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड भी घोषित किया है।
SEBI की सख्ती और गवर्नेंस पर सवाल
नतीजों के साथ ही कंपनी को एक बड़ा रेगुलेटरी झटका लगा है। SEBI ने 'Stamping & More LLP' के साथ हुए ट्रांजैक्शंस को लेकर कंपनी को चेतावनी पत्र भेजा है। आरोप है कि इन संबंधित पार्टी ट्रांजैक्शंस (RPT) के लिए शेयरहोल्डर्स की पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी, जिससे इंटरनल कंट्रोल और गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
भविष्य की रणनीति और जोखिम
कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करते हुए PCB कार्ड मैन्युफैक्चरिंग पर दांव लगाया है। इसके लिए 'Integrated Motion & Control LLP' में 51% हिस्सेदारी खरीदी गई है। मैनेजमेंट का मानना है कि इससे लागत में कमी आएगी और मार्जिन सुधरेगा। हालांकि, OEM/ODM मॉडल पर आधारित इस बिजनेस में कस्टमर कंसंट्रेशन का जोखिम हमेशा बना रहता है।
बोर्ड लेवल पर हाल ही में बदलाव हुए हैं, जिसमें जुगल किशोर चुघ के निधन के बाद अतुल मित्तल को एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या कंपनी आगामी तिमाही में अपनी घटती रेवेन्यू ग्रोथ को थाम पाती है या नहीं।
