Wonder Electricals का Financial Year 2026: प्रदर्शन और डिविडेंड
Wonder Electricals Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने रेवेन्यू और मुनाफे दोनों में साल-दर-साल (YoY) बड़ी गिरावट दर्ज की है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 26.8% घटकर ₹654.75 करोड़ रहा, जो पिछले साल FY25 में ₹894.50 करोड़ था।
मुनाफे की बात करें तो, यह 52.1% की भारी गिरावट के साथ ₹9.11 करोड़ पर आ गया, जबकि FY25 में यह ₹19.02 करोड़ था। इसके चलते कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹1.42 से घटकर ₹0.68 रह गया।
क्यों आई इतनी गिरावट?
रेवेन्यू और मुनाफे में यह बड़ी गिरावट कंपनी के मुख्य कारोबार में चल रही चुनौतियों की ओर इशारा करती है। मुनाफे में रेवेन्यू से ज़्यादा गिरावट यह बताती है कि कंपनी के मार्जिन पर दबाव है या सेल्स के मुकाबले फिक्स्ड कॉस्ट बढ़ गई है।
हालांकि, एक अच्छी खबर यह है कि कंपनी के कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग कैश फ्लो में बड़ा सुधार हुआ है। FY26 में यह ₹25.44 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसमें ₹21.61 करोड़ का इस्तेमाल हुआ था। यह कंपनी की लिक्विडिटी के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
डिविडेंड और प्रेफरेंस शेयर
कंपनी के बोर्ड ने FY25 के लिए फाइनल डिविडेंड और FY26 के लिए इंटरिम डिविडेंड के तौर पर 10% (यानी ₹0.10 प्रति शेयर) का ऐलान किया है। इसके अलावा, 4,00,000 प्रेफरेंस शेयर्स को रिडीम (Redeem) करने की भी मंजूरी दी गई है।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
FY25 में Wonder Electricals ने ₹894.50 करोड़ का रेवेन्यू और ₹19.02 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया था, जो इस साल के नतीजों से काफी बेहतर था।
कंपनी ने 2 अप्रैल 2025 को एक नई सब्सिडियरी Integrated Motion & Control LLP का भी गठन किया है। यह हरिद्वार में एक PCB कार्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है। 31 मार्च 2026 तक, यह यूनिट कंस्ट्रक्शन के अधीन थी और इसने व्यावसायिक संचालन शुरू नहीं किया था।
निवेशक अब प्रबंधन से इन गिरते रेवेन्यू और मुनाफे के रुझानों को पलटने की रणनीतियों का इंतजार करेंगे। नई सब्सिडियरी का संचालन भविष्य में कंपनी की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण होगा, भले ही इसने FY26 में कोई योगदान नहीं दिया हो। कंपनी नवंबर 2025 से लागू होने वाले नए लेबर कोड के प्रभाव का भी मूल्यांकन कर रही है।
मुख्य चिंता कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस में लगातार आ रही गिरावट है, जो यह दर्शाती है कि कंपनी का मौजूदा बिजनेस मॉडल या मार्केट पोजिशन दबाव में हो सकता है। सब्सिडियरी के ऑपरेशन शुरू होने में देरी भी कंपनी की विस्तार योजनाओं और भविष्य के रेवेन्यू के लिए जोखिम पैदा करती है।
