Wendt India का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) फाइनेंशियल ईयर 2026 में 41% घटकर ₹22.75 करोड़ रह गया। कंपनी ने इसका मुख्य कारण मशीन बिजनेस में आई कमी को बताया, जो कि कैपेक्स (Capex) में देरी और डिस्पैच (Dispatch) में रुकावटों के चलते हुआ। हालांकि, सुपर एब्रेसिव्स (Super Abrasives) और प्रिसिजन प्रोडक्ट्स (Precision Products) सेगमेंट में ग्रोथ देखने को मिली।
Wendt India के स्टैंडअलोन मुनाफे में 41% की गिरावट, ₹22.75 करोड़ पर पहुंचा
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए Wendt India का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 41% गिरकर ₹22.75 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह ₹38.29 करोड़ था। कंसोलिडेटेड (Consolidated) PAT में भी 63% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो ₹14.55 करोड़ पर आ गया (FY25 में ₹39.48 करोड़)। FY26 के लिए स्टैंडअलोन नेट सेल्स (Net Sales) ₹206.52 करोड़ रही, जो FY25 के ₹211.97 करोड़ से 3% कम है।
क्यों घटी मुनाफा?
कंपनी के मैनेजमेंट के अनुसार, मशीन बिजनेस में आई मंदी इसकी प्रमुख वजह रही। कैपेक्स (Capex) में देरी और डिस्पैच (Dispatch) में रुकावटों ने इस सेगमेंट को प्रभावित किया। हालांकि, कंपनी के सुपर एब्रेसिव्स (Super Abrasives) और प्रिसिजन प्रोडक्ट्स (Precision Products) सेगमेंट ने 5% और 7% की ग्रोथ दिखाई, जिन्होंने कुछ हद तक इस गिरावट को संभाला। सुपर एब्रेसिव्स की सेल्स ₹147.63 करोड़ और प्रिसिजन प्रोडक्ट्स की सेल्स ₹29.87 करोड़ रही।
कंपनी की नई रणनीति और विस्तार
Wendt India फिलहाल कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) से गुजर रही है। मई 2025 में, जर्मनी की Wendt GmbH ने कंपनी में अपनी 37.5% हिस्सेदारी बेच दी थी, जिससे ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) खत्म हो गया। इसके बाद, कंपनी ने जर्मनी में अपनी 100% सहायक कंपनी (Wholly Owned Subsidiary) स्थापित की है और यूरोपीय बाजारों में डिस्ट्रिब्यूशन (Distribution) और आफ्टर-सेल्स सर्विस (After-Sales Service) को मजबूत करने के लिए इसमें ₹11.81 करोड़ का निवेश किया है।
आगे क्या?
कंपनी ने FY26 के लिए कुल ₹30 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड (Dividend) घोषित किया है। इसमें ₹20 का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) जो पहले ही दिया जा चुका है, और ₹10 का फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) शामिल है। निवेशकों की नजरें अब सुपर एब्रेसिव्स और प्रिसिजन प्रोडक्ट्स सेगमेंट के प्रदर्शन के साथ-साथ नई जर्मन सब्सिडियरी (Subsidiary) के सफल एकीकरण और संचालन पर टिकी होंगी।
जोखिम
कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव एब्रेसिव्स बिजनेस के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को प्रभावित कर सकता है। सप्लाई चेन (Supply Chain) की दिक्कतें भी एक चुनौती बनी हुई हैं। मशीन बिजनेस इकोनॉमिक साइकल्स (Economic Cycles) और ग्राहकों के कैपेक्स (Capex) में बदलाव के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
