WPIL के लिए दूसरी तिमाही चुनौतीपूर्ण रही है। घरेलू बाजार में प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार और पेमेंट में देरी के कारण कंपनी का रेवेन्यू घटकर **₹354 करोड़** रह गया है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।
मुनाफे और रेवेन्यू का गणित
कंपनी ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में ₹354 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 17% कम है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि H1 के दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹93 करोड़ रहा है, जिसमें सालाना आधार पर 20% की बढ़ोतरी देखी गई है।
घरेलू और इंटरनेशनल मोर्चे पर स्थिति
घरेलू प्रोजेक्ट्स में कंपनी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, खास तौर पर पश्चिम बंगाल में सरकारी भुगतान में देरी और प्रोजेक्ट साइट्स पर काम रुकने की वजह से घरेलू रेवेन्यू ₹90 करोड़ से घटकर ₹57 करोड़ रह गया। इसके विपरीत, कंपनी का इंटरनेशनल बिजनेस एक मजबूत सहारा बनकर उभरा है, जहां H1 में 38% की दमदार ग्रोथ के साथ रेवेन्यू ₹626 करोड़ तक पहुंच गया है।
आगे की राह और मैनेजमेंट का भरोसा
फिलहाल कंपनी के पास ₹5,000 करोड़ से अधिक का मजबूत ऑर्डर बुक है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में अटके हुए सरकारी भुगतान मिलने के बाद काम में तेजी आएगी। कंपनी का EBITDA मार्जिन 15% से 20% के दायरे में रहने का अनुमान है, जिसमें इटली और दक्षिण अफ्रीका की सहायक कंपनियों का बड़ा योगदान है।
किन रिस्क पर रखें नजर?
निवेशकों को घरेलू प्रोजेक्ट्स के काम शुरू होने की गति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। सरकारी पेमेंट्स में देरी से वर्किंग कैपिटल पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भी इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट्स और मटेरियल सप्लाई के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
