Vardhman Concrete Limited ने वित्त वर्ष 2026 में अपना नेट लॉस घटाकर **₹0.01186 करोड़** दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी गंभीर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ऑडिट संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का सच
Vardhman Concrete Ltd ने अपनी 43वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के साथ ही वित्त वर्ष 2026 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹0.04302 करोड़ से घटकर इस साल ₹0.01186 करोड़ रहा है। हालांकि, राहत की इस छोटी सी खबर के पीछे कंपनी की ऑपरेशनल स्थिति पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऑडिटर्स की चेतावनी और 'गोइंग कंसर्न' संकट
स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स ने कंपनी की वित्तीय स्थिति पर 'Material Uncertainty Related to Going Concern' (कंपनी के अस्तित्व पर अनिश्चितता) की चेतावनी जारी की है। लगातार घाटे के कारण कंपनी की नेट वर्थ काफी गिर चुकी है। हालांकि मैनेजमेंट का दावा है कि उनके पास अच्छे ऑर्डर्स हैं, लेकिन कंपनी की वापसी पूरी तरह से नए फंड और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर निर्भर है।
नियमों की अनदेखी: 17 बड़े खुलासे
सेक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट में 17 गंभीर नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ है, जो कंपनी के एडमिनिस्ट्रेटिव फेलियर को दर्शाते हैं:
- इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति न करना।
- जॉइंट वेंचर्स (Diviniti और DKS-JV) के कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स न होना।
- SEBI की वेबसाइट कंप्लायंस का पालन न करना।
- अनिवार्य मीटिंग नोटिस और नतीजों को पब्लिश न करना।
- इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या पूरी न होना।
आगे की राह
मैनेजमेंट ने इन कमियों को 'अनजाने में हुई चूक' और 'कम कामकाज' बताया है। अब सबकी नजरें 28 सितंबर, 2026 को होने वाली AGM पर टिकी हैं, जहां राजेश वर्धन (Rajesh Vardhan) की दोबारा नियुक्ति और आकाश व अदिति वर्धन (Akash and Aditi Vardhan) को बोर्ड में शामिल करने पर वोटिंग होगी। देखना यह होगा कि कंपनी इन गवर्नेंस फेलियर्स को दूर करने का क्या ठोस प्लान पेश करती है।
