VMS TMT लिमिटेड के बोर्ड ने आदित्य अल्ट्रा स्टील लिमिटेड के साथ विलय को हरी झंडी दे दी है। इस मर्जर का मकसद गुजरात में 'कामधेनु' ब्रांड को मजबूत करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को बेहतर बनाना है।
VMS TMT और Aditya Ultra Steel का होगा महा-विलय!
VMS TMT लिमिटेड के बोर्ड ने 27 जून, 2026 को आदित्य अल्ट्रा स्टील लिमिटेड के साथ कंपनी के विलय (Amalgamation) को मंजूरी दे दी है। इस सौदे में एक स्वैप रेशियो तय किया गया है, जिसके तहत आदित्य अल्ट्रा स्टील के हर 100 इक्विटी शेयर के बदले VMS TMT के 75 इक्विटी शेयर मिलेंगे।
क्यों अहम है यह मर्जर?
यह विलय गुजरात में 'कामधेनु' ब्रांड के लिए बड़ा कदम साबित हो सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य TMT बार मार्केट में क्षेत्रीय बिखराव को खत्म करना है। माना जा रहा है कि इस मर्जर से एक बड़ी और एकीकृत कंपनी बनेगी, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन (Economies of Scale) और संचालन दक्षता (Operational Efficiency) में सुधार होगा।
जानिए कंपनी का बैकग्राउंड
31 मार्च, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, VMS TMT के पास कुल ₹519.41 करोड़ की संपत्ति थी और उसका टर्नओवर ₹840.20 करोड़ रहा। वहीं, आदित्य अल्ट्रा स्टील की कुल संपत्ति ₹192.97 करोड़ और टर्नओवर ₹409.90 करोड़ दर्ज किया गया था। इस विलय के बाद, संयुक्त इकाई की सालाना उत्पादन क्षमता 308,000 टन हो जाएगी।
विलय के बाद क्या बदलेगा?
इस स्कीम के पूरा होने पर आदित्य अल्ट्रा स्टील लिमिटेड को बिना किसी समापन के भंग कर दिया जाएगा। संयुक्त कंपनी 'कामधेनु' ब्रांड के लिए गुजरात में 4 डिस्ट्रिब्यूटरों और 300 डीलरों के नेटवर्क को एकीकृत करेगी। इससे बिक्री रणनीति एक समान होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
मर्जर में क्या हैं जोखिम?
इस विलय को अंतिम रूप देने के लिए SEBI, NCLT, स्टॉक एक्सचेंज (BSE और NSE) के साथ-साथ दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और लेनदारों से जरूरी रेगुलेटरी और वैधानिक मंजूरी (Regulatory Approvals) मिलना बाकी है। इन मंजूरियों पर ही मर्जर की सफलता निर्भर करेगी।
तुलना और आगे क्या?
दोनों कंपनियां TMT बार मार्केट में सक्रिय हैं। VMS TMT की 200,000 TPA और आदित्य अल्ट्रा स्टील की 108,000 TPA की उत्पादन क्षमता को मिलाकर, यह मर्जर गुजरात में एक मजबूत क्षेत्रीय खिलाड़ी बनने की ओर अग्रसर है। निवेशकों को अब SEBI, NCLT और स्टॉक एक्सचेंजों से मिलने वाली मंजूरियों पर कड़ी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही इस मर्जर के पूरा होने की समय-सीमा तय करेंगी।
