Universal Cables ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **25.5%** बढ़कर **₹3,022.67 करोड़** हो गया, जबकि स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट **68.5%** की छलांग लगाकर **₹96.53 करोड़** पर पहुंच गया। कंपनी ने **₹4.50** प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश भी की है।
Universal Cables के FY26 के नतीजे
Universal Cables Ltd ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मजबूत वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में साल-दर-साल 25.50% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹3,022.67 करोड़ पर पहुंच गया।
स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 68.52% का जबरदस्त उछाल देखा गया, जो ₹96.53 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹57.28 करोड़ था। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹163.11 करोड़ रहा।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है ये नतीजे?
यह दमदार प्रदर्शन कंपनी के प्रभावी परिचालन प्रबंधन और बाजार में उसके प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग को दर्शाता है। रेवेन्यू और प्रॉफिट में हुई यह खास बढ़ोतरी, साथ ही क्षमता विस्तार और हाई-मार्जिन सेगमेंट में एंट्री, शेयरधारकों के लिए कंपनी के भविष्य की अच्छी संभावनाएं जता रही है।
कंपनी की अब तक की कहानी
कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं का विस्तार करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है। इस साल, कंपनी ने वर्ना (Verna) फैसिलिटी में फ्लेक्सिबल वायर और मल्टी-कोर फ्लेक्सिबल केबल्स के लिए क्षमता विस्तार परियोजनाओं की शुरुआत की और सतना (Satna) में एक नई लो-वोल्टेज पावर केबल फैसिलिटी भी स्थापित की।
आगे क्या बदलेगा?
Universal Cables भविष्य के विकास और प्रोजेक्ट्स को फंड करने के लिए अपनी उधार सीमा को बढ़ाकर ₹4,500 करोड़ करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, TS Conductor Corp, USA के साथ हाई-टेम्परेचर लो-सैग (HTLS) कंडक्टर्स के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग डील कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी।
जोखिमों पर भी डालें नजर
निवेशकों को कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, खासकर कॉपर और एल्यूमीनियम के दामों में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स पर कंपनी के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। कंपनी पर कर्ज का स्तर भी एक अहम पहलू है जिस पर नजर रखी जानी चाहिए, जैसा कि डेट सर्विस कवरेज रेशियो (Debt Service Coverage Ratio) में 40.50% की साल-दर-साल गिरावट से संकेत मिलता है।
आगे क्या देखना है?
शेयरधारकों को नए प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन, HTLS कंडक्टर वेंचर की सफलता, और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व कर्ज के स्तर को प्रबंधित करने में कंपनी की रणनीतियों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
