Triveni Turbine के शेयर में गिरावट का डर? रेवेन्यू बढ़ा, पर मार्जिन और मुनाफा घटा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Triveni Turbine के शेयर में गिरावट का डर? रेवेन्यू बढ़ा, पर मार्जिन और मुनाफा घटा

Triveni Turbine ने Q1 FY27 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **19.2%** बढ़कर **₹4.43 अरब** हो गया, लेकिन मार्जिन और मुनाफे पर दबाव दिखा।

Triveni Turbine के Q1 FY27 नतीजे: रेवेन्यू चमका, पर मार्जिन पर असर

Triveni Turbine ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from Operations) में 19.2% का शानदार इजाफा हुआ है, जो कि ₹4.43 अरब तक पहुंच गया। हालांकि, कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) पर थोड़ी चोट लगी है।

मार्जिन में गिरावट का कारण

कंपनी के अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्सेस, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन (EBITDA) मार्जिन घटकर 18% रह गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 25.8% था। इसका सीधा असर प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पर पड़ा, जो 20.1% घटकर ₹697 मिलियन रह गया। PBT मार्जिन भी पिछले साल के 23.5% से गिरकर 15.7% पर आ गया।

क्यों घटे मार्जिन?

मैनेजमेंट के मुताबिक, मार्जिन पर यह दबाव पुराने समय के ऑर्डर मिक्स (Order Mix) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) की दिक्कतों के कारण आया है। कुछ पुराने, शायद कम मुनाफे वाले प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी हुई, जिसका असर इस तिमाही के नतीजों में दिख रहा है।

आगे क्या उम्मीद?

कंपनी मैनेजमेंट का मानना है कि FY27 की दूसरी छमाही में मार्जिन सुधरने की उम्मीद है। वे मीडियम से लॉन्ग टर्म में PBT मार्जिन 20% से ऊपर रखने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। कंपनी एक्सपोर्ट (Export) और आफ्टरमार्केट (Aftermarket) सेगमेंट पर खास ध्यान दे रही है, जहाँ अच्छी ग्रोथ दिख रही है।

प्रमुख आंकड़े:

  • ऑर्डर बुकिंग (Order Booking): Q1 FY27 में ₹5.68 अरब रही, जो पिछले साल से 6.1% ज्यादा है।
  • क्लोजिंग ऑर्डर बुक (Closing Order Book): 30 जून 2026 तक ₹21.8 अरब पर है, जिसमें 5.1% की सालाना बढ़ोतरी हुई है।
  • एक्सपोर्ट ऑर्डर बुकिंग: 53.4% बढ़कर कुल ऑर्डर बुकिंग का 68% रहा।
  • आफ्टरमार्केट सेगमेंट (Aftermarket Segment): क्लोजिंग ऑर्डर 115% बढ़कर ₹6.24 अरब तक पहुंच गए, जो कुल ऑर्डर बुक का 29% है।

किन जोखिमों पर नज़र रखें?

  • ऑर्डर की प्रकृति के कारण मार्जिन में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
  • बढ़ते फ्रेट रेट्स (Freight Rates) और जहाजों की अनुपलब्धता से डिलीवरी में देरी और रेवेन्यू रिकग्निशन पर असर पड़ सकता है।
  • घरेलू बाजार में किसी भी मंदी का असर भविष्य के ऑर्डर पर पड़ सकता है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.