Tinna Rubber: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! कंपनी ने दिखाया शानदार प्रदर्शन, रेवेन्यू और मुनाफे में जबरदस्त उछाल

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AuthorAditya Rao|Published at:
Tinna Rubber: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! कंपनी ने दिखाया शानदार प्रदर्शन, रेवेन्यू और मुनाफे में जबरदस्त उछाल

Tinna Rubber and Infrastructure Ltd ने वितीय वर्ष 2026 (FY26) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में **8%** का इजाफा हुआ है जो **₹545.81 करोड़** रहा। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट भी **9%** बढ़कर **₹52.85 करोड़** दर्ज किया गया है।

Tinna Rubber का दमदार प्रदर्शन

Tinna Rubber and Infrastructure Limited (TRIL) ने वितीय वर्ष 2026 (FY26) के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8% बढ़कर ₹545.81 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹505.35 करोड़ था। वहीं, कंपनी का आफ्टर टैक्स प्रॉफिट (PAT) 9% की उछाल के साथ ₹52.85 करोड़ दर्ज किया गया। इसके अलावा, कंपनी के EBITDA मार्जिन में 206 बेसिस पॉइंट का सुधार आया और यह 17.1% पर पहुंच गया।

किन वजहों से मिली सफलता?

कंपनी ने इस साल टायर प्रोसेसिंग में अपना अब तक का सबसे बड़ा वॉल्यूम हासिल किया है। भारत में यह वॉल्यूम 13% बढ़कर 155,000 TPA तक पहुँच गया। TRIL ने अपने टायर पायरोलिसिस ऑयल (TPO) और रिकवर्ड कार्बन ब्लैक (rCB) प्लांट्स को भी चालू कर दिया है। कंपनी को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के साथ ₹75.79 करोड़ का दो साल का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है, जिसने आने वाले समय के लिए कमाई का रास्ता साफ कर दिया है।

क्यों है यह खबर अहम?

ये नतीजे TRIL की बिजनेस स्ट्रेटेजी, खासकर सर्कुलर इकोनॉमी और क्षमता विस्तार पर फोकस को दर्शाते हैं। IOCL कॉन्ट्रैक्ट और सरकारी योजनाओं से कंपनी को आगे भी फायदा मिलने की उम्मीद है। हाल ही में NSE पर कंपनी की लिस्टिंग और QIP के जरिए फंड जुटाना भी इसके विकास की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है।

कंपनी की आगे की योजना

TPO और rCB प्लांट्स शुरू होने से कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में विविधता आई है। कंपनी आने वाले सालों में अपने पॉलीमर कंपाउंडिंग फैसिलिटी और MRP कैपेसिटी को बढ़ाने की योजना बना रही है। बोर्ड ने FY26 के लिए ₹3.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है।

क्या हैं जोखिम?

पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों का कच्चे माल की लागत और ओमान व एक्सपोर्ट मार्केट में लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ा है। साथ ही, साउथ अफ्रीका और सऊदी अरब में नए ऑपरेशन्स शुरू करने की शुरुआती लागत भी लग रही है।

खास आंकड़े

  • FY26 के अंत तक भारत में टायर क्रशिंग कैपेसिटी 185,000 TPA थी।
  • भारत में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 90% और ओमान में 85% रहा।
  • एक्सपोर्ट वॉल्यूम में 30% की ग्रोथ देखी गई।
  • कंपनी महाराष्ट्र सरकार की PSI – 2019 स्कीम के तहत अगले छह सालों में लगभग ₹22-24 करोड़ का ग्रांट पाने की हकदार है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.