Tata Steel को अपने पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी, Rujuvalika Investments के विलय के लिए NCLT से हरी झंडी मिल गई है। इस प्रक्रिया का मुख्य मकसद कॉर्पोरेट ढांचे को सरल बनाना और ऑपरेशनल खर्चों को कम करना है।
NCLT की मुहर और आगे की राह
मुंबई स्थित National Company Law Tribunal (NCLT) ने Tata Steel और उसकी सब्सिडियरी Rujuvalika Investments के मर्जर को मंजूरी दे दी है। इस योजना की प्रभावी तारीख 1 अप्रैल 2023 मानी गई है, जबकि NCLT द्वारा इसे 1 अक्टूबर 2026 को मंजूरी दी गई।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह कदम Tata Steel की रणनीतिक योजना का हिस्सा है। कंपनी अपनी जटिल कॉर्पोरेट बनावट को सरल बनाना चाहती है। Rujuvalika को खुद में समाहित करने से अनावश्यक कानूनी औपचारिकताएं और रेगुलेटरी कंप्लायंस का बोझ कम होगा, जिससे लंबी अवधि में ऑपरेशनल कॉस्ट में बचत होगी।
पुरानी बाधाएं और भुगतान
इस विलय को पूरा करने के लिए कंपनी ने पहले ही एक बड़ी बाधा पार कर ली थी। अप्रैल 2025 में Tata Steel ने Joint Plant Committee (JPC) के बकाया के तौर पर ₹2,824.15 करोड़ का भुगतान किया था, जो कि इस मर्जर की एक अहम शर्त थी।
निवेशकों पर क्या असर होगा?
चूंकि यह एक पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी थी, इसलिए निवेशकों को किसी भी प्रकार के इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) की चिंता करने की जरूरत नहीं है। Rujuvalika के शेयर रद्द कर दिए जाएंगे और कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। इसके बाद, Rujuvalika को अपनी NBFC रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट RBI को 15 दिनों के भीतर सरेंडर करना होगा। अकाउंटिंग के लिए कंपनी Ind AS 103 के तहत 'Pooling of Interest Method' का पालन करेगी।
अब कंपनी ROC के पास NCLT के आदेश को फाइल करेगी, जिसके बाद यह विलय पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा।
