Tata Steel को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Rujuvalika Investments के विलय के लिए NCLT से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस कदम से कंपनी अपना कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर सरल कर रही है, जिससे भविष्य में अनुपालन लागत (compliance cost) में कमी आएगी।
विलय से क्या बदलेगा?
टाटा स्टील ने घोषणा की है कि उसे NCLT मुंबई बेंच से अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई, Rujuvalika Investments को खुद में मिलाने के लिए सर्टिफाइड ऑर्डर प्राप्त हो गया है। इस विलय का मुख्य उद्देश्य कंपनी की जटिल संरचना को सरल बनाना है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
चूंकि Rujuvalika Investments पहले से ही टाटा स्टील की 100% सहायक कंपनी है, इसलिए इस विलय के कारण कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे और न ही किसी नकद भुगतान की आवश्यकता होगी। सरल शब्दों में, विलय प्रभावी होते ही सब्सिडियरी कंपनी के सभी एसेट्स और लायबिलिटीज टाटा स्टील में ट्रांसफर हो जाएंगे और सब्सिडियरी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
अब तक का सफर और आगे की राह
यह प्रक्रिया जून 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिली नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के बाद आगे बढ़ी थी। साथ ही, कंपनी ने अप्रैल 2025 में जॉइंट प्लांट कमेटी को ₹2,824.15 करोड़ के लोन का निपटान कर एक महत्वपूर्ण औपचारिकता पूरी की थी। इस मर्जर के बाद, Rujuvalika Investments के पास मौजूद NBFC लाइसेंस को RBI को सरेंडर कर दिया जाएगा। अब बस रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में कागजी कार्रवाई पूरी होते ही यह मर्जर कानूनी रूप से प्रभावी हो जाएगा।
