Tarmat Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने स्टैंडअलोन फाइनेंशियल नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने पिछले साल के ₹1.67 करोड़ की तुलना में इस साल ₹6.56 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कि 292.8% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी 15.9% बढ़कर ₹117.37 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹101.28 करोड़ था।
ऑडिटरों की रिपोर्ट में बड़ा सवाल
कंपनी के इन शानदार नतीजों के बीच, एक चिंताजनक बात सामने आई है। कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटरों ने अपनी रिपोर्ट में 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है। यह राय कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड दोनों फाइनेंशियल नतीजों पर दी गई है। मामला ज्वाइंट वेंचर 'Backbone Tarmat Alfaraa' में किए गए ₹7.83 करोड़ के निवेश से जुड़ा है। ऑडिटरों का कहना है कि JV से जरूरी फाइनेंशियल जानकारी न मिलने के कारण वे इस निवेश का सही मूल्यांकन (valuation) नहीं कर पाए हैं।
क्या है इसका मतलब?
एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' का मतलब है कि फाइनेंशियल स्टेटमेंट कंपनी की पूरी वित्तीय स्थिति का सही और निष्पक्ष चित्र पेश नहीं कर सकते, खासकर उस निवेश के संबंध में। शेयरधारकों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। कंपनी के मैनेजमेंट को अब इस JV के वित्तीय आंकड़े जुटाने होंगे और ऑडिटरों की चिंताओं को दूर करना होगा।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
फिलहाल, कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू बढ़ना अच्छी खबर है, लेकिन JV निवेश पर स्पष्टता न होना निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है। यह एक बड़ा रिस्क है कि इस ₹7.83 करोड़ के निवेश का सही मूल्य पता न चलने पर भविष्य में कंपनी को एडजस्टमेंट या राइट-डाउन करना पड़ सकता है।
