Tahmar Enterprises के लिए मुश्किल भरा रहा फाइनेंशियल ईयर। कंपनी का घाटा **₹5.60 करोड़** पहुंच गया है, जबकि बैंक ने कंपनी के कैश क्रेडिट फैसिलिटी को NPA घोषित कर दिया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू घटकर ₹7.98 करोड़ रह गया है, जबकि सालाना घाटा पिछले साल के ₹2.61 करोड़ से बढ़कर ₹5.60 करोड़ हो गया है। बरदवाड़ी (Beradwadi) डिस्टिलरी में कामकाज ठप रहने के कारण कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर पड़ा है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि कंपनी को 2029 तक के लिए 'कंसेंट टू ऑपरेट' (Consent to Operate) मिल गया है।
कर्ज का संकट और NPA का दबाव
कंपनी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत The Kolhapur District Central Co-operative Bank Limited की ओर से आई है। 31 मार्च, 2026 को कंपनी के कैश क्रेडिट फैसिलिटी को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) में डाल दिया गया है। जुलाई 2026 में कंपनी को SARFAESI एक्ट के तहत डिमांड नोटिस भी मिला, जिसके बाद अब मैनेजमेंट अपनी प्रॉपर्टी बेचकर बैंक का बकाया चुकाने की कोशिश कर रहा है।
नई रणनीति की ओर कदम
अब कंपनी अपना ध्यान बल्क स्पिरिट बेचने से हटाकर ब्रांडेड लिकर (Branded Liquor) की मैन्युफैक्चरिंग पर लगा रही है। साथ ही, कंपनी 'Tahmar Solar' नाम से एक नए बिजनेस वर्टिकल में भी उतरने की तैयारी कर रही है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
29 सितंबर, 2026 को होने वाली 35वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें ₹500 करोड़ तक के रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन पर शेयरधारकों की वोटिंग होनी है। प्लांट का दोबारा सुचारू रूप से शुरू होना और बैंक के साथ लोन रीस्ट्रक्चरिंग की बातचीत ही कंपनी की आगे की दिशा तय करेगी।
