Swan Defence and Heavy Industries ने FY26 में शानदार ₹282.14 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹7.03 करोड़ से काफी ज्यादा है। कंपनी को नए डिफेंस ऑर्डर भी मिले हैं, लेकिन नेट लॉस बढ़कर ₹227.51 करोड़ हो गया है।
Swan Defence: दिवालियापन से वापसी, रेवेन्यू में बड़ी उछाल, पर घाटे से जूझ रही कंपनी
Swan Defence and Heavy Industries के लिए हालिया वित्तीय वर्ष (FY26) मिला-जुला रहा। कंपनी का रेवेन्यू ऑपरेशन से बढ़कर ₹282.14 करोड़ हो गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) के सिर्फ ₹7.03 करोड़ की तुलना में एक जबरदस्त छलांग है। यह बड़ी बढ़ोतरी कंपनी के कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से सफलतापूर्वक बाहर निकलने और नए ऑर्डर्स हासिल करने का नतीजा है।
क्यों खास है यह रेवेन्यू जंप?
CIRP से बाहर आने के बाद Swan Defence ने अपनी ऑपरेशन्स को फिर से शुरू किया है और बिजनेस में नई जान फूंकी है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और डिफेंस सेक्टर में कंपनी ने मजबूत पकड़ बनाई है, जो इसके रेवेन्यू में आई इस बड़ी तेजी से साफ झलकता है।
कंपनी का बैकग्राउंड
Swan Defence ने हाल ही में अपने लेनदारों (Committee of Creditors) के साथ सभी देनदारियों का निपटान किया है। इसके अलावा, कंपनी ने एक शिपयार्ड का अधिग्रहण किया है और अपने बिजनेस ऑपरेशन्स को फिर से शुरू कर दिया है। कंपनी ने 10% मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) की अनिवार्यता को भी पूरा कर लिया है।
आगे क्या?
कंपनी अब ग्रोथ के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जिसका अंदाजा उसके मजबूत ऑर्डर बुक से लगाया जा सकता है। इनमें Rederyet Stenersen AS से छह केमिकल टैंकरों के लिए 227 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट, Energy ONE Limited से चार डुअल-फ्यूल अमोनिया बल्क कैरियर का ऑर्डर, और ओमान से एक ट्रेनिंग वेसल के लिए डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट शामिल है।
इतना ही नहीं, कंपनी ने ₹4,000 करोड़ तक की फंड जुटाने की योजना भी बनाई है। यह फंड Qualified Institutional Placement (QIP), कर्ज या प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट जैसे विभिन्न माध्यमों से जुटाया जा सकता है, जो कंपनी की विस्तार योजनाओं या वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को दर्शाता है। कंपनी ने Triumph Offshore Private Limited के साथ मर्जर की स्कीम को भी मंजूरी दे दी है।
खतरे की घंटी
इन सकारात्मक खबरों के बावजूद, कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती नेट लॉस है। FY26 में कंपनी का नेट लॉस बिफोर टैक्स ₹227.51 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹181.49 करोड़ के लॉस से भी ज्यादा है। यह बताता है कि कंपनी अभी भी बॉटम-लाइन पर दबाव झेल रही है, संभवतः रिवाइवल फेज के दौरान हाई फिक्स्ड कॉस्ट के कारण। इसके अलावा, बाहरी देशों के सरकारी सब्सिडी वाले शिपयार्ड्स से प्रतिस्पर्धा और समुद्री उपकरणों के आयात पर निर्भरता भी इसके लिए जोखिम पैदा करती है।
तुलना और आगे क्या देखें
Swan Defence के पास भारत का सबसे बड़ा ड्राई डॉक है, लेकिन उसे चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों के स्थापित शिपबिल्डर्स से कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
निवेशक अब कंपनी द्वारा नए ऑर्डर्स को पूरा करने की गति, ऑपरेशनल कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता, और प्रस्तावित ₹4,000 करोड़ के फंडरेज़ और कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग की सफलता पर बारीकी से नज़र रखेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी बढ़े हुए रेवेन्यू को मुनाफे में कैसे बदल पाती है।
