नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Swan Defence और Triumph Offshore के मर्जर को मंजूरी दे दी है। इस मर्जर से शिपबिल्डिंग में कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, CBI और ED जैसी एजेंसियों की जारी जांच निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
NCLT ने Swan Defence के मर्जर को दी मंजूरी
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की अहमदाबाद बेंच ने Triumph Offshore Private Limited और Swan Defence and Heavy Industries Limited के बीच स्कीम ऑफ अरेंजमेंट और अमाल्गमेशन को मंजूरी दे दी है। इस मर्जर की प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2024 तय की गई है।
मर्जर का मकसद
इस एकीकरण का मुख्य उद्देश्य दोनों कंपनियों के ऑपरेशन्स को एक साथ लाना है। इससे Swan Defence शिपबिल्डिंग और हैवी इंजीनियरिंग के पूरे वैल्यू चेन को संभालने में सक्षम होगी, जिसमें डिजाइन, निर्माण से लेकर फाइनेंसिंग और लीजिंग तक शामिल है। कंपनी का लक्ष्य कॉस्ट कंट्रोल, क्वालिटी और डिलीवरी टाइमलाइन को बेहतर बनाना है।
पुरानी चिंताएं और जांच का साया
NCLT की सुनवाई के दौरान, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) और रीजनल डायरेक्टर (RD) जैसे रेगुलेटरी अथॉरिटीज ने कुछ ऐतिहासिक कंप्लायंस मुद्दों को उठाया था। इनमें कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) रिपोर्टिंग, डिपॉजिट रिटर्न (DPT-3) फाइलिंग और वित्तीय वर्ष 2020-2023 के लिए एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में देरी जैसे मुद्दे शामिल थे। कंपनी का कहना है कि ये मुद्दे कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से पहले के हैं और 'क्लीन स्लेट' सिद्धांत लागू होता है।
NCLT के आदेश में यह भी माना गया है कि Swan Defence and Heavy Industries के खिलाफ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI), एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) जैसी एजेंसियां सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि इस स्कीम की मंजूरी कंपनी या उसके अधिकारियों को किसी भी पिछले या भविष्य के वैधानिक नॉन-कंप्लायंस से छूट नहीं देती है।
क्या बदलेगा?
इस मर्जर के तहत, Triumph Offshore के हर 1000 इक्विटी शेयर्स के बदले Swan Defence के 1325 प्रेफरेंस शेयर्स (फेस वैल्यू ₹10 प्रत्येक) जारी किए जाएंगे। इससे एक एकीकृत इकाई का निर्माण होगा।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम Swan Defence के खिलाफ चल रही विभिन्न एजेंसियों की जांच है। भले ही कंपनी ऐतिहासिक कंप्लायंस मुद्दों के लिए 'क्लीन स्लेट' सिद्धांत पर भरोसा कर रही है, लेकिन इन जांचों से भविष्य में अनिश्चितताएं और संभावित देनदारियां पैदा हो सकती हैं।
वित्तीय आंकड़े (31 दिसंबर, 2025 तक)
- Triumph Offshore (ट्रांसफरर) का रेवेन्यू ₹381.04 करोड़ रहा, जबकि प्रॉफिट बिफोर टैक्स ₹1,558.20 करोड़ था।
- Swan Defence (ट्रांसफरी) का रेवेन्यू ₹7.03 करोड़ था और लॉस बिफोर टैक्स ₹(181.49) करोड़ दर्ज किया गया।
NCLT के आदेश में 31 मार्च, 2024 तक Swan Defence के इक्विटी एडजस्टमेंट का भी जिक्र है, जिसमें ₹2,106.49 करोड़ का रिटेन्ड अर्निंग्स (डेबिट), ₹1,500.11 करोड़ का सिक्योरिटीज प्रीमियम और ₹797.46 करोड़ का कैपिटल रिजर्व शामिल है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को CBI, ED और SFIO द्वारा की जा रही जांचों की प्रगति और नतीजों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, RoC द्वारा उठाए गए ऐतिहासिक कंप्लायंस गैप्स को दूर करने में कंपनी के प्रयासों पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
