Supreme Infrastructure India Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए शानदार नेट प्रॉफिट पेश किया है। लेकिन इस उछाल के पीछे की असल वजह ऑपरेशनल सफलता नहीं बल्कि डेट रिस्ट्रक्चरिंग (Debt Restructuring) है।
मुनाफे के पीछे का असली खेल
कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर में ₹5,79,659.70 लाख का नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले साल के ₹1,42,625.83 लाख के नुकसान के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है। हालांकि, यह मुनाफा ऑपरेशनल कामकाज से नहीं, बल्कि कोर्ट-अप्रूव्ड स्कीम के तहत डेट रिस्ट्रक्चरिंग और सेटलमेंट के कारण हुआ है। इसके साथ ही कंपनी ने अपनी 43वीं AGM की तारीख 12 नवंबर, 2026 तय कर दी है।
ऑडिटर्स की चेतावनी (Auditor's Warning)
कंपनी के ऑडिटर्स M/s. Borkar & Muzumdar ने नतीजों में 'मटेरियल अनिश्चितता' का क्लॉज जोड़ा है। उन्होंने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) स्टेटस पर सवाल उठाए हैं और पुराने रिसीवेबल्स की रिकवरी को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
निवेशकों के लिए जोखिम
अभी भी 3 ऐसे फाइनेंशियल क्रेडिटर्स हैं जिनके साथ सेटलमेंट की प्रक्रिया बाकी है। इसके अलावा, ऑडिटर्स ने ₹2,78,805.87 लाख के इंटरेस्ट रिवर्सल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि अभी तक 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (NDC) नहीं मिले हैं।
आगे क्या है योजना?
कंपनी का मौजूदा ऑर्डर बुक ₹3,329 करोड़ का है, जिसमें नायगांव का BDD Chawl और पवई का GCC प्रोजेक्ट शामिल है। निवेशकों को कंपनी के ऑपरेशनल कैश फ्लो और कर्ज निपटान की प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी जाती है।
