EPC सेक्टर की दिग्गज कंपनी Sugs Lloyd Ltd को अपनी **₹225 करोड़** की क्रेडिट सुविधाओं के लिए CRISIL BBB/Stable रेटिंग मिली है। सितंबर 2025 में आए IPO के बाद कंपनी के डेट मेट्रिक्स में सुधार हुआ है और ऑर्डर बुक **₹807 करोड़** के पार पहुंच गई है।
रेटिंग का आधार
CRISIL रेटिंग्स ने Sugs Lloyd Ltd के लॉन्ग-टर्म लोन के लिए CRISIL BBB/Stable और शॉर्ट-टर्म के लिए CRISIL A3+ रेटिंग दी है। यह रेटिंग कंपनी के मजबूत मार्केट प्रेजेंस और प्रोजेक्ट पाइपलाइन पर मुहर लगाती है।
फाइनेंशियल सेहत का हाल
कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति में बड़ा बदलाव दिखा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम बढ़कर ₹300.7 करोड़ हो गई, जो पिछले साल ₹175.2 करोड़ थी। कंपनी का PAT मार्जिन 9.5% पर स्थिर रहा है। सितंबर 2025 में आए IPO से जुटाए गए फंड के चलते मार्च 2026 तक डेट-टू-नेट वर्थ रेशियो सुधरकर 0.5 गुना रह गया है।
बिजनेस और ऑपरेशनल स्ट्रेंथ
Sugs Lloyd मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और सोलर प्रोजेक्ट्स का काम करती है। कंपनी के पास 30 जून 2026 तक ₹807 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर बुक है, जिसे अगले 12 से 24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है। कंपनी महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात सहित 8 राज्यों में सक्रिय है।
रिस्क फैक्टर और सावधानियां
तेजी के बावजूद EPC सेक्टर की अपनी चुनौतियां हैं:
- वर्किंग कैपिटल का दबाव: कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल काफी लंबा है। ग्रॉस करंट एसेट्स 265 दिन के हैं, जिसमें रिसीवेबल्स क्लीयर होने में करीब 245 दिन का समय लग रहा है।
- कंपटीशन: EPC सेक्टर में एंट्री बैरियर्स कम होने के कारण कंपनी की बारगेनिंग पावर पर दबाव रहता है।
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल बैंक लिमिट यूटिलाइजेशन 85% पर है। निवेशकों को यह ट्रैक करना होगा कि कंपनी अपने रिसीवेबल्स साइकिल को कैसे बेहतर करती है और लिक्विडिटी मैनेज करती है। सालाना कैश अक्रूअल ₹35-40 करोड़ रहने का अनुमान है, जो कंपनी की लिक्विडिटी को फिलहाल सुरक्षित रखता है।
