Sudal Industries के लिए FY26 का फाइनेंशियल ईयर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का मुनाफा गिरकर **90.59 लाख रुपये** के शुद्ध घाटे (Net Loss) में बदल गया है, जिसका मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और कानूनी विवाद हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और चुनौतियां
कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 18,150.51 लाख रुपये तक जरूर पहुंचा है, लेकिन मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी पूरी तरह लड़खड़ा गई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को 569.78 लाख रुपये का मुनाफा हुआ था, जो इस बार 90.59 लाख रुपये के घाटे में तब्दील हो गया। मैनेजमेंट का कहना है कि एल्युमीनियम और बिलेट की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और एनर्जी कॉस्ट बढ़ने का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जा सका, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ा।
कानूनी पेंच और ऑडिट की मुश्किलें
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय कंपनी का 'प्री-पैकेज्ड इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्लान' (PPIRP) है, जो फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। NCLAT द्वारा पिछली बार इस प्लान को खारिज करने के बाद से कंपनी कानूनी संकट में फंसी है। ऑडिटर ने साफ कहा है कि इस केस की वजह से कंपनी की देनदारियों और कैश फ्लो पर सटीक टिप्पणी करना फिलहाल संभव नहीं है।
इंटरनल कंट्रोल और भविष्य की राह
ऑडिट रिपोर्ट में इनवेंटरी मैनेजमेंट, पेरोल और रिसीवेबल्स के मामले में 'इंटरनल कंट्रोल' को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, रेगुलेटरी फाइलिंग में देरी और जुर्माना न बताने जैसी खामियां भी सामने आई हैं। अब कंपनी टॉपलाइन ग्रोथ की जगह 'EBDIT मार्जिन' सुधारने पर जोर दे रही है और SOPs तैयार किए जा रहे हैं। आगामी 26 सितंबर, 2026 को होने वाली AGM में मैनेजिंग डायरेक्टर सुदर्शन श्रीराम चोखानी की री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
