Sterling and Wilson Renewable Energy ने Q1 FY27 के लिए ₹53 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, रेवेन्यू ₹1,590 करोड़ रहा, जिसे मैनेजमेंट ने नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने में देरी को वजह बताया है। कंपनी की अनएग्जीक्यूटेड ऑर्डर वैल्यू रिकॉर्ड ₹13,000 करोड़ पर पहुंच गई है।
Detailed Coverage
Sterling and Wilson Renewable Energy के नतीजे
Sterling and Wilson Renewable Energy ने वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू ₹1,590 करोड़ रहा, जो पिछले तिमाही और पिछले साल की इसी तिमाही, दोनों के मुकाबले कम है। मैनेजमेंट का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ईपीसी (EPC) प्रोजेक्ट्स में काम की धीमी रफ्तार और नए प्रोजेक्ट्स के लिए नोटिस टू प्रोसीड (NTP) व लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) मिलने में देरी इसकी मुख्य वजह है।
रेवेन्यू में गिरावट के बावजूद, कंपनी ने ₹53 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 36% अधिक है। यह बढ़ोतरी कम इफेक्टिव टैक्स रेट के कारण भी संभव हुई है।
ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए (EBITDA) ₹78 करोड़ रहा, जो 4.9% मार्जिन दर्शाता है। रिपोर्टेड ईबीआईटीडीए ₹96 करोड़ रहा, जिसमें फॉरेन एक्सचेंज गेन्स का भी फायदा मिला। कंपनी के ग्रॉस मार्जिन 9.9% रहे, और मैनेजमेंट का अनुमान है कि पूरे साल के लिए ईपीसी ग्रॉस मार्जिन 8% से 10% के बीच रहेंगे।
क्यों अहम हैं ये नतीजे?
ये नतीजे बताते हैं कि कंपनी के टॉपलाइन पर फिलहाल प्रोजेक्ट शुरू होने में हो रही बाहरी देरी का असर दिख रहा है। हालांकि, पीएटी (PAT) में हुई बढ़ोतरी और ₹13,000 करोड़ की रिकॉर्ड अनएग्जीक्यूटेड ऑर्डर वैल्यू (UOV) भविष्य के लिए मजबूत संकेत दे रही है। कंपनी का ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) बिजनेस भी तेजी से बढ़ा है, जिसकी पोर्टफोलियो क्षमता 18.3 गीगावाट तक पहुंच गई है और यह कंपनी को स्थिर एन्युटी इनकम दे रहा है।
आगे क्या?
निवेशक अब कंपनी से उम्मीद कर रहे हैं कि वह वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही (H2 FY27) में अपने बड़े ऑर्डर बुक को सक्रिय एग्जीक्यूशन में बदलेगी। मिस्र में सोलर पीवी प्लांट (BESS के साथ) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का सफल आगाज महत्वपूर्ण होगा। मैनेजमेंट का यह आश्वासन कि देरी सिर्फ समय से जुड़ी है और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है, थोड़ी राहत देता है।
जोखिम
नए प्रोजेक्ट्स के NTP और LOA में और देरी, ग्रॉस मार्जिन को 8-10% के बीच बनाए रखना, और O&M मार्जिन को 20% के आसपास रखना, ये कुछ ऐसे प्रमुख बिंदु हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
