Steel Authority of India (SAIL) के नतीजों में दमदार तेजी दिखी है। कंपनी का Q2 मुनाफा साल-दर-साल आधार पर **315%** बढ़कर **₹1,773.73 करोड़** पर पहुंच गया है। हालांकि, ऑपरेशंस में मजबूती के बावजूद कंपनी बोर्ड कंपोजिशन नियमों का पालन न करने के कारण जांच के घेरे में है।
मुनाफे में धमाकेदार उछाल
कंपनी ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए मजबूत फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं। SAIL का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल के इसी दौर में ₹426.79 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1,773.73 करोड़ हो गया है। साथ ही, ऑपरेशन से हुई कमाई भी बढ़कर ₹31,997.51 करोड़ दर्ज की गई है, जो पिछले साल ₹26,703.94 करोड़ थी। इस दौरान कंपनी की सेल्स वॉल्यूम में 5% का इजाफा हुआ है।
क्यों दमदार रहे नतीजे?
प्रॉफिट में यह उछाल कंपनी की कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन और हाई-एंड स्टील प्रोडक्ट्स पर रणनीति का नतीजा है। कंपनी अपना कर्ज कम करने पर लगातार काम कर रही है, जो फिलहाल ₹20,583 करोड़ के स्तर पर है। इससे कंपनी का बैलेंस शीट काफी मजबूत नजर आ रहा है।
रेगुलेटरी संकट: क्या है विवाद?
सब कुछ अच्छा दिख रहा था, लेकिन स्टेट्यूटरी ऑडिटर ने बोर्ड कंपोजिशन को लेकर एक गंभीर 'मटेरियल नॉन-कंप्लायंस' की चेतावनी दी है। कंपनी में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और एक महिला डायरेक्टर की कमी है, जो SEBI के LODR नियमों और कंपनी एक्ट का सीधा उल्लंघन है।
निवेशकों के लिए जोखिम
बोर्ड का यह खालीपन ऑडिट कमिटी और नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमिटी के कामकाज को प्रभावित कर रहा है, जो रेगुलेटरी रिस्क बढ़ाता है। निवेशकों को कंपनी के बोर्ड रीस्ट्रक्चरिंग के फैसले पर नजर रखनी होगी। इसके अलावा, सरकारी सेल्स में 'प्रोविजनल प्राइसिंग' का मुद्दा भविष्य में कमाई के आंकड़ों में बदलाव ला सकता है।
