Starlineps Enterprises का FY26 का नेट प्रॉफिट गिरकर **₹1.11 करोड़** पर आ गया है, जो पिछले साल **₹6.57 करोड़** था। मुनाफे में आई इस गिरावट की बड़ी वजह एसेट राइट-ऑफ (Write-off) है। हालांकि, कंपनी ने रेवेन्यू में बढ़त दर्ज की है और अब केमिकल व रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में विस्तार की तैयारी कर रही है।
मुनाफे में सुस्ती की असल वजह
कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे बताते हैं कि ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर ₹97.44 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹73.34 करोड़ था। लेकिन, नेट प्रॉफिट में बड़ी गिरावट देखी गई। मैनेजमेंट के अनुसार, ₹5.29 करोड़ का 'कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस' राइट-ऑफ करना पड़ा, जिसका सीधा असर बॉटम लाइन पर पड़ा है।
फंड्स और लिक्विडिटी का गणित
कंपनी ने हाल ही में राइट्स इश्यू और प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए पूंजी जुटाई है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि 31 मार्च, 2026 तक प्रेफरेंशियल इश्यू से मिले ₹107.38 करोड़ अभी भी खर्च नहीं हुए हैं। यह भारी नकदी कंपनी के नए बिजनेस (केमिकल, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्सटाइल) के लिए अहम साबित हो सकती है।
बड़े बदलाव और नई रणनीतियां
कंपनी अब पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रही है। इसी कड़ी में Celloraa Energy Private Limited में 20% हिस्सेदारी खरीदी गई है। साथ ही, बोर्ड में बदलाव करते हुए Mr. Deep Trivedi को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। आगामी AGM (30 सितंबर, 2026) में नए स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स M/s. Shah & Shah की नियुक्ति पर भी शेयरधारकों की मुहर लगेगी।
इन जोखिमों पर रखें नजर
निवेशकों को याद रखना चाहिए कि पिछले बोनस इश्यू में देरी के चलते BSE ने कंपनी पर ₹40,000 का जुर्माना लगाया था। कंपनी के पास मौजूद अनयूटिलाइज्ड कैपिटल का सही इस्तेमाल और एनर्जी सेक्टर में विस्तार की सफलता ही आने वाले समय में स्टॉक की दिशा तय करेगी।
