Standard Batteries Share Price: निवेशकों को झटका! कंपनी को ₹0.496 करोड़ का भारी घाटा, आमदनी भी गिरी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Standard Batteries Share Price: निवेशकों को झटका! कंपनी को ₹0.496 करोड़ का भारी घाटा, आमदनी भी गिरी
Overview

Standard Batteries Ltd को चालू फाइनेंशियल ईयर (FY26) में ₹0.496 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल कंपनी को ₹0.8166 करोड़ का प्रॉफिट था। कंपनी की कुल आमदनी भी घटकर सिर्फ ₹0.1013 करोड़ रह गई है। ऐसे में निवेशकों की नज़र अब कंपनी की रिकवरी स्ट्रैटेजी पर होगी।

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Standard Batteries को ₹0.496 करोड़ का घाटा

Standard Batteries Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस वर्ष ₹0.496 करोड़ (₹49.60 लाख) का नेट लॉस हुआ है। यह पिछले वित्तीय वर्ष (FY2025) में हुए ₹0.8166 करोड़ (₹81.66 लाख) के नेट प्रॉफिट के बिल्कुल उलट है।

आमदनी में भारी गिरावट

सिर्फ घाटा ही नहीं, कंपनी की कुल आमदनी (Total Income) में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। FY26 में कंपनी की आमदनी घटकर ₹0.1013 करोड़ (₹10.13 लाख) रह गई, जबकि FY25 में यह ₹1.3634 करोड़ (₹136.34 लाख) थी।

निवेशकों के लिए चिंता का सबब

मुनाफे से सीधे घाटे में जाना और आमदनी का इस कदर गिरना, Standard Batteries के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह इस बात का संकेत है कि कंपनी को अपने स्टील ट्रेडिंग बिज़नेस में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। निवेशक अब कंपनी के मैनेजमेंट से इस ट्रेंड को पलटने और वापस मुनाफे में लौटने की रणनीति जानना चाहेंगे।

कंपनी का बिज़नेस और ऑडिट

Standard Batteries मुख्य रूप से स्टील प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग का काम करती है। FY26 के नतीजे इसी सेगमेंट में आई बड़ी मंदी को दर्शाते हैं। हालांकि, ऑडिटर्स ने कंपनी के नतीजों पर एक स्पष्ट राय (unmodified opinion) दी है, जिसका मतलब है कि वित्तीय विवरण सही तस्वीर पेश करते हैं, भले ही प्रदर्शन नकारात्मक रहा हो।

आगे क्या?

इस घाटे के ऐलान के बाद, अब सारी नज़रें कंपनी के मैनेजमेंट और बोर्ड पर हैं कि वे क्या कदम उठाते हैं। बोर्ड ने मिस्टर प्रदीप भार, जो एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, को रोटेशन से रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। साथ ही, R. N. Shah & Associates को 79वीं एनुअल जनरल मीटिंग के लिए Scrutinizer नियुक्त किया गया है।

जोखिम पर भी डालें नज़र

कंपनी पर इनकम टैक्स कानून के तहत काफी डेफर्रड डेप्रिसिएशन (unabsorbed depreciation) और कैरी-फॉरवर्ड लॉसेस (carry-forward losses) का बोझ है। भविष्य में टैक्सेबल इनकम को लेकर अनिश्चितता के कारण, कोई डेफर्रड टैक्स एसेट (deferred tax asset) नहीं पहचाना गया है। इसके अलावा, कंपनी का सिर्फ एक ही बिज़नेस सेगमेंट (स्टील ट्रेडिंग) पर निर्भर रहना भी एक बड़ा जोखिम है।

आगे क्या ट्रैक करें?

निवेशकों को कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। यह देखना अहम होगा कि क्या कंपनी की आमदनी में सुधार होता है और वह फिर से मुनाफे में आती है। मैनेजमेंट की आमदनी में गिरावट को रोकने की रणनीति और जमा हुए टैक्स लॉसेस का प्रबंधन, ये कुछ ऐसे फैक्टर हैं जिन पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.